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और कैसे रक़ीब के यार हमसे पेश आते

विनय wrote 1 year ago: और कैसे रक़ीब के यार हमसे पेश आते वह हमसे अय्यारी नहीं तो और क्या फ़रमाते हमारी क़िस्मत में जीते-जी फ़ना … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, ज़िन्दगी, इश्क़, दोस्त, रक़ीब, Heart, Love, दिल, प्यार