Blogs about: Comfort

मेरी मोहब्बत को समझते हो तुम ग़लत9 comments

विनय wrote 5 months ago: मेरी मोहब्बत को समझते हो तुम ग़लत, ग़लत नहीं है तुमको चाहा है मैंने अगर इसमें कुछ ग़लत नहीं है दिखा … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, इश्क़, Love, डर, प्यार, चेहरा, मोहब्बत, हसीन, नज़र

दरवाज़े पे चुप-चुप से वह बैठे हैं

विनय wrote 1 year ago: दरवाज़े पे चुप-चुप से वह बैठे हैं दबा के मेरे जैसे तन्हाई वह बैठे हैं उनके दीदार से जो मुझे सुकून है … more →

Tags: रुबाइयाँ, इश्क़, Heart, Love, तन्हाई, दिल, प्यार, मोहब्बत, दरवाज़े

मैं उससे मोहब्बत करता था

विनय wrote 1 year ago: मैं उससे मोहब्बत करता था आज भी करता हूँ काँच के दिल में जान भरता हूँ मेरे ख़ाबों में मेरे सपनों में … more →

Tags: मेरा गीत, ख़ाब, ज़िन्दगी, इश्क़, Heart, Love, Moment, अकेला, दिल

एक मुलाक़ात की इल्तजा है2 comments

विनय wrote 1 year ago: एक मुलाक़ात की इल्तजा है उससे दुआ है वह क्यों नहीं मिलता मुझसे उसे क्या शुबा है मुझ मुरीद को न क़रार ह … more →

Tags: मेरी नज़्म, apart, इल्तजा, इश्क़, खु़दा, गुल, जुदा, दिलरुबा, दुआ

हमारा वाक़िया

विनय wrote 1 year ago: वो तस्कीं न मेरे दर पे माथा टेके न ही रौज़न से झाँके सिर्फ़ - खा़बों को बे-रब्त किए घूमती है हर गली हर … more →

Tags: मेरी नज़्म, इश्क़, किस्सा, कूचा, ख़ाब, गली, तस्कीं, दर, प्यार


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