न कोई शिकायत है तुझसे न कोई गिला है तुम अपने हसीं लबों से हर्फ़ छुओ न छुओ कम-स-कम बाहम निगाहों में गुफ़्त-गू है! बाहम= आपस में शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’ लेखन वर्ष: २००४… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: न कोई शिकायत है तुझसे न कोई गिला है तुम अपने हसीं लबों से हर्फ़ छुओ न छुओ कम-स-कम बाहम निगाहों में गु … more →
विनय wrote 1 year ago: इश्क़ सुना है हमने बहुत ज़रा करके तो देखें मिल जाये कोई कमसिन हसीना उसपे मरके तो देखें हाए रे हाए, हाए … more →
विनय wrote 2 years ago: वह मुझे चाहती है या यूँ ही मुझसे बात करनी थी उसे कोशिश तो उसने मुझ तक पहुँचने की बहुत की थी और फिर व … more →
विनय wrote 2 years ago: क्या पाया और कितना पाया ज़िन्दगी से हमें कोई गिला नहीं सुना है जितना भी देता है खु़दा जीने के लिए मुन … more →