मतलब से ही जनम लेता है कोई रिश्ता मतलब से ही मिट जाता है वह रिश्ता तख़लीक़ के इस भँवर में तकलीफ़ है बहुत सँभलकर बुन जब भी बुन नया रिश्ता शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’ लेखन वर्ष: २००३ … more →
तख़लीक़-ए-नज़रPraful wrote 2 months ago: THE REVEALED I The booming commotion of Existence that rolls in the bosom of the Beyond, … more →
Praful wrote 2 months ago: NATURE OF CREATION The positive in an atom loves the negative, though neutron separates them so that … more →
विनय wrote 11 months ago: मतलब से ही जनम लेता है कोई रिश्ता मतलब से ही मिट जाता है वह रिश्ता तख़लीक़ के इस भँवर में तकलीफ़ है बह … more →
विनय wrote 1 year ago: मेरे ही हाथों में टूटा है दम मेरा, तेरे ही स्पर्श से तख़लीक़ हुआ है यह ‘विनय’ अभी-अभी मेर … more →