हिंदी मैं ब्लॉग देखना और लिखना मेरे लिए नया है और बेहद रोमांचक भी क्यूँकि मुझे पता ही नहीं था की इन्टरनेट पर हिंदी इतनी ज्यादा प्रचलित है. मैं एक विशुद्ध हिन्दीभाषी हूँ और हिंदी में हमेशा लिखता रहा हू… more →
कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी: Awakening of Crushed AmbitionsSarvesh K Tiwari wrote 3 weeks ago: jora rusiyAna ko hai tega khurAsAna hU kI nIti inglaNDa chIna hunnara mahAdarI himmata amAna maradAn … more →
पा.ना. सुब्रमणियन wrote 3 weeks ago: पिछले वर्ष ही पुत्र के साथ जयपुर जाना हुआ था. दो तीन दिन का प्रवास था. जयपुर के मुख्य रेलवे स्टेशन क … more →
उन्मुक्त wrote 1 month ago: ‘पुरुषों की ब्रीफ तो लम्बी हो सकती है पर महिलाओं की स्कर्ट ब्रीफ नहीं हो सकती। नेकटाई मर्यादित … more →
पा.ना. सुब्रमणियन wrote 1 month ago: दक्षिण अमरीका की सबसे ऊंची और लम्बी पर्वत श्रंखला “एंदेस” (Andes) (हिमालय के बाद यही पृथ्वी पर सबसे … more →
Sarvesh K Tiwari wrote 1 month ago: Travels have kept us from continuing with the case of Akbar’s U-Turn, which hopefully we shall … more →
Rahul Katyayan wrote 1 month ago: हिंदी मैं ब्लॉग देखना और लिखना मेरे लिए नया है और बेहद रोमांचक भी क्यूँकि मुझे पता ही नहीं था की इन् … more →
Rahul Katyayan wrote 1 month ago: हिंदी मैं ब्लॉग देखना और लिखना मेरे लिए नया है और बेहद रोमांचक भी क्यूँकि मुझे पता ही नहीं था की इन् … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: अध्यात्मरतिरासीनो निरपेक्षो निरामिषः आत्मनैव सहायेन सुखार्थी विचरेदिह हिंदी में भावार्थ-अध्यात्म वि … more →
Rahul Katyayan wrote 1 month ago: बरसों से बिना बात जिससे रूठा रहा, उस मुस्कराहट को खींच कर होठों पे लाने की ये कोशिश है सम्मान मैं इत … more →
Rahul Katyayan wrote 1 month ago: बरसों से बिना बात जिससे रूठा रहा, उस मुस्कराहट को खींच कर होठों पे लाने की ये कोशिश है सम्मान मैं इत … more →
Rahul Katyayan wrote 1 month ago: मैं क्यों हारूँगा किस्मत से जबकि मुझे ये ऐतबार है मेरी हर हार मैं छिपी खुदा तेरी भी हार है … more →
Rahul Katyayan wrote 1 month ago: मैं क्यों हारूँगा किस्मत से जबकि मुझे ये ऐतबार है मेरी हर हार मैं छिपी खुदा तेरी भी हार है … more →
Rahul Katyayan wrote 2 months ago: दोस्तों, मैं एक पेड हूँ. नीम का एक विशाल पेड़. कई साल से यहाँ खडा रहने के बावजूद एक लम्बा सफर तय … more →
Rahul Katyayan wrote 2 months ago: दोस्तों, मैं एक पेड हूँ. नीम का एक विशाल पेड़. कई साल से यहाँ खडा रहने के बावजूद एक लम्बा सफर तय … more →
पा.ना. सुब्रमणियन wrote 2 months ago: जब हम लोग मुंबई गए थे, हमारे साले साहब ने सुझाया कि कहीं बाहर चलें. सबका रुझान तो धार्मिक पर्यटन पर … more →
पा.ना. सुब्रमणियन wrote 2 months ago: बात पुरानी है. हम उन दिनों युवा थे और बस्तर में पदस्थ थे. हम पांच मित्रोंने मिलकर भद्राचलम जाने का क … more →
पा.ना. सुब्रमणियन wrote 2 months ago: यह बात हम नहीं कह रहे हैं. गिनीज़ बुक में लिखा है कि संसार में इतना बड़ा महिलाओं द्वारा आयोजित कोई द … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: चंदा लेकर समाज सेवा करने वाली उस संस्था के समाजसेवी बरसों तक अध्यक्ष रहे। पहले जब वह युवा थे तब उनक … more →
Sarvesh K Tiwari wrote 6 months ago: Words of fire from kavirAja bhUShaNa have always held us captivated since the days of boyhood. When … more →