मैं वो आग हूँ जो लग जाऊँ तो जंगल का तिनका-तिनका जला दूँ फैल जाऊँ चंद लम्हों में कुछ इस तरह जैसे आग के बवण्डर आग के तूफ़ाँ… मैं हूँ विनय, ‘विनय’ हूँ मैं एक मेरे सिवा यहाँ कोई कुछ नहीं … more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: मैं वो आग हूँ जो लग जाऊँ तो जंगल का तिनका-तिनका जला दूँ फैल जाऊँ चंद लम्हों में कुछ इस तरह जैसे आग क … more →