विनय wrote 1 year ago: रोज़ ही होता है होंठों तक बात आते-आते रह जाती है मेरी इक कमी तेरे रू-ब-रू मुझे लब खोलने नहीं देती कित … more →
विनय wrote 1 year ago: नित उड़ता हूँ तेरी कजरारी अँखियों में मैं रंग-बिरंगे सपनों की छतरी लेके साँवले का मन लुभाके, बिजली ग … more →