ख़ाब सब ख़ाब हैं आँखों में बिखरे हुए दिल के कोने-कोने तक छितरे हुए वह अब कहाँ बाक़ी जो था मुझमें मैं अब कहाँ ढूँढू जो था तुझमें ख़ाब सब ख़ाब हैं आँखों में बिखरे हुए भीगी-भीगी थी ज़मीं सूखे पाँव थे जलते-… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 5 months ago: ख़ाब सब ख़ाब हैं आँखों में बिखरे हुए दिल के कोने-कोने तक छितरे हुए वह अब कहाँ बाक़ी जो था मुझमें मैं … more →