और कुछ भी नही दर्पण में अपनी छवि देख रहे थे देखा तेरा अक्स,और कुछ भी नही | जमाने के फसाने सुनने चाहे हमने सुनी तेरी धड़कन,और कुछ भी नही | खुदा से गुनाहो की माफी माँगनी चाही माँगा सिर्फ़ तुझे,और कुछ … more →
mehekmehhekk wrote 1 year ago: और कुछ भी नही दर्पण में अपनी छवि देख रहे थे देखा तेरा अक्स,और कुछ भी नही | जमाने के फसाने सुनने चाह … more →