Lost your password?

Blogs about: Darshan

Featured Blog

दीपावली का पर्व निकल गया-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: होश संभालने के बाद शायद जिंदगी में यह पहली दिवाली थी जिसमें मिठाई नहीं खाई। कभी इसलिये मिठाई नहीं खा … more →

Tags: abhivyakti, इंटरनेट, चिंतन, दीपक भारतदीप, मस्तराम, रचना, लेखक, व्यंग्य, संपादकीय

चाणक्य नीति-कुविचारी नारी से तो कोई साथ न हो अच्छा (chankya niti-kuvichari nari ka sath

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: नीति विशारद चाणक्य महाराज कहते हैं कि ———————— … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, इंटरनेट, चिन्तन, दीपक भारतदीप, धर्म, शब्द, संस्कार, हिंदी पत्रिका

इसलिये सोचना ही बंद-आलेख (mor thinking is not good-hindi lekh)1 comment

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: अखबार में खबर छपी है कि ‘ब्रिटेन ने माना है कि तेल के व्यापार की वजह से बम विस्फोट के एक आरोपी को छो … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, इंटरनेट, चिंतन, दीपक भारतदीप, मस्तराम, रचना, लेखक

पिंजर से बाहर झांकता ज्ञान-आलेख चिंत्तन

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: उनके चेहरे पर बटन की तरह टंगी आंखें कपड़े और किताबों के पिंजर से बाहर झांकती दिखती है। ऐसा लगता है कि … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, हास्य व्यंग्य, Dashboard, Deepak bharatdeep, epatrika, hindi megzine, hindi patrika

तंबू फिर तनेगा-त्रिपदम

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: क्यों डरे हो काफिला लुट गया फिर बनेगा। यह तूफान उड़ा ले गया तंबू फिर तनेगा। हार या जीत का चक्र चलता ह … more →

Tags: इंटरनेट, मस्त राम, शायरी, हास्य, हिन्दी, Deepak bharatdeep, mast ram, web bhaskar, web dunia

कबीर के दोहे: विवेकहीन को अच्चे बुरे की पहचान नहीं होती 2 comments

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: फूटी आँख विवेक की, लखें न संत असतं जिसके संग दस बीच हैं, ताको नाम महंत संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते ह … more →

Tags: हिन्दी, चिंतन, अध्यात्म, अभिव्यक्ति, hindu, dharm, dohe, India, सन्देश

रहीम संदेश: समय ख़राब हो तो कटु वचन सुनने पड़ते हैं1 comment

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: समय परे ओछे बचन, सब के सहे रहीम सभा दुसासन पट गहे, गदा लिए रहे भीम कविवर रहीम कहते हैं कि बुरा समय आ … more →

Tags: आलेख, रहीम, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Dashboard, adhyatm, संस्कार, सन्देश, समाज

झूठ भी सच की तरह सजाते-व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: हर पल लोगों के सामने अपना कद बढाने की कोशिश हर बार समाज में सम्मान पाने की कोशिश आदमी को बांधे रहती … more →

Tags: inglish, चिन्तन, शायरी, व्यंग्य, India, web dunia, web bhaskar, web navabharat, hindi sahitya

दक्षिण एशिया के साहित्यकार आतंक पर सच लिख भी कहां पाये-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: अभी हाल ही में दक्षिण एशिया के देशों का एक साहित्यकार सम्मेलन संपन्न हुआ। इसमें भारत, पाकिस्तान,श्री … more →

Tags: आलेख, चिन्तन, vyangya, bharat, India, web dunia, web bhaskar, hindi sahitya, कथा साहित्य

भारतीय धर्म-दर्शन की परंपरा और भक्ति आंदोलन-1

संपादक- मिथिलेश वामनकर wrote 8 months ago: ओमप्रकाश कश्यप  भारतीय परंपरा में जीवन के चार पुरुषार्थ माने गए है। धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष। ये जीव … more →

Tags: भारतीय दर्शन, ओमप्रकाश कश्यप, भक्ति आंदोलन, भारतीय धर्म-दर्शन की, hindi, mppsc, UPSC

रहीम सन्देश: प्रेम और सम्मान में धीरे धीरे होती है बढोतरी

दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: रहिमन अति न कीजिए, गहि रहिए निज कानि सैंजन अति फूलै तऊ, डार पात की हानि कविवर रहीम कहते हैं कि कभी भ … more →

Tags: Blogroll, Hindi Darshan, Hindu darshan, Hindu culture, India, bharat, hindu dharm, hindi duniya, web duniya

संत कबीर संदेशः उपदेश देने से क्या लाभ जब सुनने वाले का दिमाग घर में न हो 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: संत शिरोमणि कबीरदास जी के अनुसार ————————— … more →

Tags: Hindi writing, web duniya, web dunia, web jagaran, web bhasakar, web nai duniya, Deepak bharatdeep, हिंदी, हिंदी पत्रिका

चुंबन का स्वाद न मीठा होता है न नमकीन-हास्य व्यंग्य1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: सिनेमा या टीवी के पर्दे पर चुंबन का दृश्य देखकर लोगों के मन में हलचल पैदा होती है। अगर ऐसे में कहीं … more →

Tags: hasya -vyangya, hasya vyang, vyangya, writer, aritile in hindi, हिंदी आलेख, हिंदी, hindi article, swad

ब्रहमाण्ड का रहस्य जानने का प्रयास नाकाम तो होना ही था-व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: महामशीन के रूप में चर्चित महादानवीय मशीन का प्रयोग अब रुक गया है। अगर आज के सभ्य समाज में महिमा मंडि … more →

Tags: इंटरनेट, चिन्तन, दीपक भारतदीप, व्यंग्य, शब्द, साहित्य, हिंदी साहित्य, bharat, epatrika

संत कबीर वाणी दूसरे से उम्मीद करने पर होता है अपमान

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आस आस घर घर फिरै, सहै दुखारी चोट कहैं कबीर भरमत फिरै,ज्यों चैसर की गोट संत शिरोमणि कबीरदास कहते हैं … more →

Tags: Blogroll, inglish, हिन्दी, अभिव्यक्ति, Education, Blogging, web duniya, web dunia, web jagaran

विदुर नीति: विद्वान दुर्लभ वस्तु को प्राप्त करने की कामना नहीं करते

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1.संपूर्ण भौतिक पदार्थों की वास्तविकता का जो ज्ञान रखता है तथा सभी कार्यों को संपन्न करने का ढंग तथा … more →

Tags: Hindi writing, web duniya, hindi megzine, web dunia, web jagaran, web bhasakar, web nai duniya, Deepak bharatdeep, हिंदी पत्रिका

आतंकी हिंसा पर बुद्धिजीवियों की निरर्थक बहस-संपादकीय

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: एक शवयात्रा में दो आदमी पीछे जा रहे थे एक ने कहा-‘बेकार आदमी था। किसी के काम का नहीं था’ दूसरे ने कह … more →

Tags: hindi, आलेख, चिन्तन, व्यंग्य, vyangya, bharat, Friends, web dunia, web bhaskar

संत कबीर वाणीः किसी काम के नहीं हों तो ऊंचे आदमी होने से क्या लाभ1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जोरे बड़ मति नांहि जैसे फूल उजाड़ को, मिथ्या हो झड़ जांहि संत शिरोमणि कबीरदास … more →

Tags: Hindi writing, web duniya, hindi megzine, web dunia, web jagaran, web bhasakar, web nai duniya, Deepak bharatdeep, हिंदी पत्रिका

शैतान कभी मर नहीं सकता-हास्य व्यंग्य1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: शैतान कभी इस जहां में मर ही नहीं सकता। वजह! उसके मरने से फरिश्तों की कदर कम हो जायेगी। इसलिये जिसे अ … more →

Tags: आलेख, चिंतन, संपादकीय, अभिव्यक्ति, व्यंग्य, सन्देश, अनुभूति, Deepak bharatdeep, दीपक भारतदीप


Have your say. Start a blog.

See our free features →

Related Tags
All →

Follow this tag via RSS