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पिंजर से बाहर झांकता ज्ञान-आलेख चिंत्तन

दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: उनके चेहरे पर बटन की तरह टंगी आंखें कपड़े और किताबों के पिंजर से बाहर झांकती दिखती है। ऐसा लगता है क … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, हास्य व्यंग्य, darshan, Deepak bharatdeep, epatrika, hindi megzine, hindi patrika

भारत के शिक्षित लोगों का बौद्धिक अंतर्द्वंद्व -आलेख

दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: भारत का शिक्षित वर्ग हमेशा ही मानसिक द्वंद्व में फंसा दिखता है जो पश्चात्य सभ्यता के समर्थन और विरो … more →

Tags: आलेख, कथा साहित्य, दीपक भारतदीप, व्यंग्य, शब्द, हिंदी, हिंदी कविता, हिंदी पत्रिका, हिंदी साहित्य

पैसे के साथ इश्क में भी आ सकता है मंदी का दौर - हास्य व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: क्वीसलैंड यूनिवर्सटी आफ टैक्लनालाजी के प्रोफेसर कि अनुसार इस मंदी के दौर में लोगों के दाम्पत्य जीवन … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, मस्तराम, व्यंग्य, हास्य व्यंग्य, हिन्दी पत्रिका, Blogging, Deepak bapu

लड़की, लड़का और गिरगिट की नज़र-हास्य व्यंग्य1 comment

दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: शाम का समय था और उन शराब के नशे में धुत उन दोनों लड़कों में एक ने राह पर अकेले जा रही उस लड़की का ह … more →

Tags: कला, मस्तराम, व्यंग्य चिंतन, हंसना, हास्य व्यंग्य, bharat, Deepak bapu, Deepak bharatdeep, E-patrika

बाजार से धर्म बना या धर्म से बाजार-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: धर्म यानि क्या? आप भारतीय पौराणिक ग्रंथों को अगर पढ़ते हैं तो उसका सीधा आशय आचरण से है पर उनमें किसी … more →

Tags: Blogroll, web duniya, web dunia, hindi nai duinia, hindi megzine, Deepak bharatdeep, hindu dharm, Hindu culture, hindi jagran

समाज, संस्कार और संस्कृति की रक्षा का प्रश्न-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: हम अक्सर अपने संस्कार और संस्कृति के संपन्न होने की बात करते हैं। कई बार आधुनिकता से अपने संस्कार औ … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, मस्तराम, व्यंग्य, समाज, हिन्दी पत्रिका, Blogging, Deepak bapu, E-patrika

बड़ा कौन, कलम कि जूता-हास्य व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: देश के बुद्धिजीवियों का एक गोलमेज सम्मेलन बुलाया गया था। गोलमेज सम्मेलन का विषय था कि ‘जूता बड़ा कि … more →

Tags: Blogroll, writing, inglish, संपादकीय, व्यंग्य चिंतन, अभिव्यक्ति, India, हास्य व्यंग्य, अनुभूति

रहीम संदेशःहंस के समान मानसिक रूप से दृढ़ होना चाहिए

दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: सरवर के खग एक से, बाढ़त प्रीति न धीम पै मराल को मानसर, एकै ठौर रहीम अधिकतर पक्षी एक समान होते हैं। उ … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, दृष्टिकोण, प्रचार, रहीम, हिंदी, Deepak bharatdeep, Family

मनुस्मृति:ढोंगी आदमी को पानी भी न पिलायें 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: न वार्यपि प्रयचछत्तु बैडालव्रतिके द्विजे न बकव्रतिके विप्रे नावेदविदि धर्मवित् धार्मिक वृत्ति के लोग … more →

Tags: Blogroll, Hindi Darshan, Hindu darshan, bharat, hindu dharm, web duniya, hindi adhyatm, hindi life, hindi megzine

महिला जाग्रति के लिए-हास्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: प्रदूषण पर आयोजित कार्यक्रम में वह विद्वान बोल रहे थे ”घर से कितना भी सजकर सड़क पर खुले में ज … more →

Tags: कला, कविता, ज्ञान, व्यंग्य, शायरी, शेर, समाज, साहित्य, हास्य व्यंग्य

कुछ न पढा, रौनक है चेहरे पर इसलिए-हास्य कविता3 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: निकले सुबह अपने घर से धोती-कुर्ता और टोपी पहने रास्ते में जो भी मिलता यह कहता ”दीपक बापू क्या … more →

Tags: अनुभूति, मनोरंजन, व्यंग्य, हास्य, हास्य कविता, हास्य व्यंग्य, हिंदी पत्रिका, bharat, Blogroll

शायद ही लोग समझ पाएं-कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जो हमसे रूठ जाएं उन्हें हम कैसे समझाएं पहले खुद को ही तो समझ पाएं पल-पल बदलता मन एक पल जो अच्छा लग … more →

Tags: Blogroll, hindi Personal, Hindi friends, Hindi knowledge, Hindi shayri, hasya vyangy, Hindi writing, bharat, web duniya

मनु स्मृति: दंड का उचित उपयोग न करने वाला अपयश का भागी

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १. जो व्यक्ति ऐसे लोगों को दंड देता है जिन्हें दंड नहीं देना चाहिए तथा जिनको देना चाहिऐ उनको नहीं द … more →

Tags: adhyatm, astha, अध्यात्म, आलेख, आस्था, इंटरनेट, चिन्तन, दर्शन, दीपक भारतदीप

रौशनी और अँधेरे का व्यापार-हास्य कविता 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: वादों के बादल बरसने का मौसम जब आता है यादों पर ग्रहण लग जाता है जजबातों के सौदागर तय करते हैं कि कौन … more →

Tags: arbic, अनुभूति, इंटरनेट, कविता, काव्य, चिन्तन, व्यंग्य, शब्द, शायरी

रहीम के दोहे:ह्रदय कुएँ से अधिक गहरा नहीं होता

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: रहिमन थोरे दिनन को, कौन करे मुहँ स्याह नहीं छलन को परतिया, नहीं कारन को ब्याह कवि रहीम कहते हैं कि क … more →

Tags: hindi Personal, Hindi Education, Hindi friends, Hindi writing, Hindu darshan, hindi bharat, hindu dharm, web duniya, hindi vichar

पहले अपनी नीयत बताओ 2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कहते हैं रामजी के होने के भौतिक सबूत हमारे सामने लाओ नहीं ला सकते तो उन्हें भूल जाओ राम जी की माया अ … more →

Tags: अनुभूति, कविता, ज्ञान, साहित्य, हास्य, हास्य कविता, हास्य व्यंग्य, हिन्दी, हिन्दी शायरी

विदुर नीति-अपराधी की संगत करने पर भी सजा मिल जाती है

दीपक भारतदीप wrote 4 weeks ago: नीति विशारद विदुर महाराज कहते है कि अस्तयागात् पापकृतामापापांस्तुल्यो दण्डः स्पृशते मिश्रभावात्। शुष … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, मस्तराम, हिंदी पत्रिका, हिन्दी, Deepak bapu, Deepak bharatdeep, hindi adhyatm, Hindi Blogging

संत कबीर के दोहे: भक्ति और ध्यान एकांत में करें

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: चर्चा करु तब चौहटे, ज्ञान करो तब दोय ध्यान करो तब एकिला, और न दूजा कोय संत श्री कबीरदास जी का कथन है … more →

Tags: अभिव्यक्ति, कबीर वाणी, मस्तराम, समाज, साहित्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Blogging, Deepak bapu

दोनों ब्लॉग ज़ब्त होना चिंता का विषय नहीं-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: दूसरे का मामला हो तो दिलचस्प हो जाता है पर जब स्वयं उससे जुड़े हों तो चिंताजनक लगता है। यही इस लेखक … more →

Tags: अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, संपादकीय, Blogging, Deepak bapu, Deepak bharatdeep, E-patrika, Hindi Blog


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