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	<title>david-j-polly &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://wordpress.com/tag/david-j-polly/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "david-j-polly"</description>
	<pubDate>Wed, 09 Jul 2008 13:59:37 +0000</pubDate>

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<title><![CDATA[द थ्योरी आफ "कूडे का ट्रक"]]></title>
<link>http://saptrang.wordpress.com/?p=242</link>
<pubDate>Fri, 02 May 2008 07:30:32 +0000</pubDate>
<dc:creator>Nitin Bagla</dc:creator>
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<description><![CDATA[सुबह सुबह किसी बात पर मूड खराब हुआ तो य]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>सुबह सुबह किसी बात पर मूड खराब हुआ तो यह "कूडे के ट्रक वाला सिद्धांत" याद आ गया। कुछ दिन पहले एक ई पत्र में प्राप्त हुआ था। सार कुछ इस तरह से है।</p>
<blockquote><p>क्या आप एक खराब ड्राइवर, किसी अभद्र कर्मचारी, किसी बदमिजाज दुकानदार के चक्कर में अपना दिन खराब कर लेते हैं? सडक चलते आपसे किसी ने कुछ कह दिया, कोई दुकानदार बद्तमीजी से पेश आया, रेस्तरां में गये और सर्विस अच्छी नही हुई आदि आदि? एक अच्छे/सफल इन्सान का गुण यह है कि वह किस तरह से ऐसी गैरजरूरी बातों को नज़रअंदाज करके अपना ध्यान जरूरी कामों पर लगाये। कूडे के ट्रक का सिद्धांत कहता है कि -</p>
<p>"कई लोग कूडे से भरे ट्रक की तरह होते हैं। वे अपने साथ साथ क्रोध, भय, घृणा, नैराश्य का कचरा अन्दर में समेटे चलते हैं। जैसे जैसे यह कचरा उनके अन्दर भरता चला जाता है, उन्हे इसे कहीं फेंकने की जरूरत महसूस होती है। ठीक कचरे से भरे ट्रक की तरह। हो सकता है बदकिस्मती से आज आप उनके रास्ते में आ गये और उन्होने इसे आपके ऊपर फेंक दिया।</p>
<p><strong>तो अबकी बार कोई अपना <em>कचरा</em> आपके ऊपर इस तरह फेंके, तो इसे दिल पर मत लीजिये। सामने वाले पर तरस खाइये। मुस्कुराकर उसे नजरंदाज कीजिये और खुश रहिये। आप ज्यादा अच्छा और प्रसन्न महसूस करेंगे। और हाँ, ये भी देखें कि कितनी बार हम अपना गुस्सा दूसरों पर उतारते हैं और कचरे के ट्रक की तरह बर्ताव करते हैं।"</strong></p></blockquote>
<p>ई मेल में इसके रचियता का नाम था, David J Polly. थोडा गूगल किया तो पता चला कि "The Law of Garbage Truck" डेविड साहब का ट्रेड मार्क है। वे एक ख्यातनाम वक्ता और लेखक हैं। कचरे के ट्रक वाली कहानी विस्तार से आप <a href="http://pos-psych.com/news/david-j-pollay/20071002426" target="_blank">यहाँ</a> पढ सकते हैं, अंग्रेजी में। इस पर एक <a href="http://www.bewareofgarbagetrucks.com/home" target="_blank">वेबसाइट</a> भी है। <a href="http://www.bewareofgarbagetrucks.com/blog/blogger.html" target="_blank">यहाँ</a> और <a href="http://davidjpollay.typepad.com/david_j_pollay/" target="_blank">यहाँ</a> डेविड साहब के ब्लाग भी हैं।</p>
<p>सिद्धांत सुनने में अच्छा लगता है ना। भारतीय दर्शन पर नज़र डालेंगे तो हमारे यहां इस तरह का दृष्टांत भगवान  बुद्ध के प्रेरक प्रसंगों में मिलता है। जब एक व्यक्ति बुद्ध को खूब गालियां देता है पर वो जरा भी विचलित नही होते। शिष्य के पूंछने पर उसे समझाते हैं कि भई जब वो गालियां मैने स्वीकार ही नहीं कीं तो वो तो उसी के पास रही ना। मुझे लगी ही नही। मुझे उससे क्या फर्क पडता है।</p>
<p>सो नया तो कुछ भी नही है, बचपन से पढते आ रहे हैं, जीवन में उतार सकें तो बात बने।</p>
]]></content:encoded>
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