जब-जब सनम तेरी यादें आती हैं कैसे कहें कितना तन्हा कर जाती हैं रोते हैं सब से छिपकर अँधेरों में ख़ुद से इतना रुसवा कर जाती हैं अँधेरी राहों-सा दिल सूना हो जाता है जब आँखों में तेरा सपना टूट जाता है ख… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: जब-जब सनम तेरी यादें आती हैं कैसे कहें कितना तन्हा कर जाती हैं रोते हैं सब से छिपकर अँधेरों में ख़ुद … more →