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Blogs about: Dec 2007

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मेरी ज़बां से मेरा ही अफ़साना बिखरा1 comment

Rohit Jain wrote 1 year ago: मेरी ज़बां से मेरा ही अफ़साना बिखरा ढ़ूँढ़ो कहां जाने ये दिल दीवाना बिखरा नाकाम मै है इस से भी ग़ारत नहीं … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, ही, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

आँखों में

Rohit Jain wrote 1 year ago: तेरी तस्वीर है आँखों में फ़िर से नीर है आँखों में दिल में लगता है ख़वाब है इक ताबीर है आँखों में जिस स … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, में, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

इक जाम-ए-जुनूं को लबों से लगाया है

Rohit Jain wrote 1 year ago: इक जाम-ए-जुनूं को लबों से लगाया है दिल को इक नये ग़म का नशा कराया है ये कैसी हलचल मची है महफ़िल में क् … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain, को

ज़िंदगी सियाह है ज़रा तुम नूर थाम लो

Rohit Jain wrote 1 year ago: ज़िंदगी सियाह है ज़रा तुम नूर थाम लो भरी तन्हाई में मुझे कुछ दूर थाम लो तुम्हारे नाम से मुझको ज़माना जा … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain, है


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