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Blogs about: Dec 2008

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मेरे वजूद को यूँ तेरे काम आना है2 comments

Rohit Jain wrote 9 months ago: मेरे वजूद को यूँ तेरे काम आना है जिगर का लख़्त लख़्त होंठ पर सजाना है न जाने क्या कहा है शम्अ ने परवान … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Rohit, jain, 2008, को, है, मेरे, यूँ

यहाँ पर4 comments

Rohit Jain wrote 10 months ago: जाँ देके हमने दिल को सँभाला है यहाँ पर कुछ ऐसे उसकी याद को टाला है यहाँ पर अब सोचते हैं मौत में ही च … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey

यही मंज़र यहाँ पे ताहद-ए-नज़र होंगे5 comments

Rohit Jain wrote 10 months ago: यही मंज़र यहाँ पे ताहद-ए-नज़र होंगे टूट के बिखरे से तूफ़ान में ये घर होंगे जो अभी उड़ रहा है देख आसमाँ म … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey

आ तेरे प्यार में तामीर करूँ ताजमहल7 comments

Rohit Jain wrote 11 months ago: मै बनूं शाहजहां तू मेरी मुमताज़ महल आ तेरे प्यार में तामीर करूँ ताजमहल तू ही उर्दू का अदब और तू ही श … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, में, रोहित, जैन, कविता, Rohit, jain, 2008


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