Blogs about: Dec

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मेरे वजूद को यूँ तेरे काम आना है2 comments

Rohit Jain wrote 5 months ago: मेरे वजूद को यूँ तेरे काम आना है जिगर का लख़्त लख़्त होंठ पर सजाना है न जाने क्या कहा है शम्अ ने परवान … more →

Tags: 2008 A Poetic Journey, मेरी गज़लें, DEC 2008, 2008, आना, काम, को, तेरे, मेरे

आ तेरे प्यार में तामीर करूँ ताजमहल4 comments

Rohit Jain wrote 6 months ago: मै बनूं शाहजहां तू मेरी मुमताज़ महल आ तेरे प्यार में तामीर करूँ ताजमहल तू ही उर्दू का अदब और तू ही शे … more →

Tags: 2008 A Poetic Journey, मेरी गज़लें, DEC 2008, में, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit

मेरी ज़बां से मेरा ही अफ़साना बिखरा1 comment

Rohit Jain wrote 1 year ago: मेरी ज़बां से मेरा ही अफ़साना बिखरा ढ़ूँढ़ो कहां जाने ये दिल दीवाना बिखरा नाकाम मै है इस से भी ग़ारत नहीं … more →

Tags: 2007 A Poetic Journey, मेरी गज़लें, Dec 2007, 2007, अफ़साना, कविता, गज़ल, जैन, बिखरा

आँखों में

Rohit Jain wrote 1 year ago: तेरी तस्वीर है आँखों में फ़िर से नीर है आँखों में दिल में लगता है ख़वाब है इक ताबीर है आँखों में जिस स … more →

Tags: 2007 A Poetic Journey, मेरी गज़लें, Dec 2007, 2007, आँखों, कविता, गज़ल, जैन, में

इक जाम-ए-जुनूं को लबों से लगाया है

Rohit Jain wrote 1 year ago: इक जाम-ए-जुनूं को लबों से लगाया है दिल को इक नये ग़म का नशा कराया है ये कैसी हलचल मची है महफ़िल में क् … more →

Tags: 2007 A Poetic Journey, मेरी गज़लें, Dec 2007, 2007, इक, कविता, को, गज़ल, जाम

ज़िंदगी सियाह है ज़रा तुम नूर थाम लो

Rohit Jain wrote 1 year ago: ज़िंदगी सियाह है ज़रा तुम नूर थाम लो भरी तन्हाई में मुझे कुछ दूर थाम लो तुम्हारे नाम से मुझको ज़माना जा … more →

Tags: 2007 A Poetic Journey, मेरी गज़लें, Dec 2007, 2007, कविता, गज़ल, जैन, तुम, थाम

Achchha Huaa Chin ki nakal nahi ki

bhookh wrote 1 year ago: Achchha Huaa Chin ki nakal nahi kiAchchha Huaa Chin ki nakal nahi ki … more →


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