कभी हम मौसम थे कभी ख़ुद मौसम था सावन की चाह में इक सावन मिला तो दूसरा गया आजकल अकेला हूँ शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’ लेखन वर्ष: २०००-२००१ … more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: कभी हम मौसम थे कभी ख़ुद मौसम था सावन की चाह में इक सावन मिला तो दूसरा गया आजकल अकेला हूँ शायिर: विनय … more →
विनय wrote 1 year ago: लोग कहते हैं इश्क़ ने किया है मुझको गुमराह दुनिया में आया हूँ जिसके लिए करे मुझको ज़िबह जिसके लम्स ने … more →
विनय wrote 1 year ago: I am a jerk, I am a creep But what are you? You deceived me by knowing You are mean, you know Silly … more →