मेरे वजूद को यूँ तेरे काम आना है जिगर का लख़्त लख़्त होंठ पर सजाना है न जाने क्या कहा है शम्अ ने परवाने से के अब उसे तो जल के ख़ाक ही हो जाना है जो तूने कह दिया तो तर्क़ेमोहब्ब्त कर ली जज़ा में अब भले ही ह… more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 5 months ago: मेरे वजूद को यूँ तेरे काम आना है जिगर का लख़्त लख़्त होंठ पर सजाना है न जाने क्या कहा है शम्अ ने परवान … more →
Rohit Jain wrote 6 months ago: मै बनूं शाहजहां तू मेरी मुमताज़ महल आ तेरे प्यार में तामीर करूँ ताजमहल तू ही उर्दू का अदब और तू ही शे … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: मेरी ज़बां से मेरा ही अफ़साना बिखरा ढ़ूँढ़ो कहां जाने ये दिल दीवाना बिखरा नाकाम मै है इस से भी ग़ारत नहीं … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: तेरी तस्वीर है आँखों में फ़िर से नीर है आँखों में दिल में लगता है ख़वाब है इक ताबीर है आँखों में जिस स … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: इक जाम-ए-जुनूं को लबों से लगाया है दिल को इक नये ग़म का नशा कराया है ये कैसी हलचल मची है महफ़िल में क् … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: ज़िंदगी सियाह है ज़रा तुम नूर थाम लो भरी तन्हाई में मुझे कुछ दूर थाम लो तुम्हारे नाम से मुझको ज़माना जा … more →