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मेरी ज़बां से मेरा ही अफ़साना बिखरा
मेरी ज़बां से मेरा ही अफ़साना बिखरा ढ़ूँढ़ो कहां जाने ये दिल दीवाना बिखरा नाकाम … more »
इक शायर अंजाना सा...
मेरी ज़बां से मेरा ही अफ़साना बिखरा
— 1 comment
Rohit Jain wrote 4 months ago: मेरी ज़बां से मेरा ही अफ़साना बिखरा ढ़ूँढ़ … more »
आँखों में
Rohit Jain wrote 4 months ago: तेरी तस्वीर है आँखों में फ़िर से नीर है … more »
इक जाम-ए-जुनूं को लबों से लगाया है
Rohit Jain wrote 4 months ago: इक जाम-ए-जुनूं को लबों से लगाया है दिल क … more »
ज़िंदगी सियाह है ज़रा तुम नूर थाम लो
Rohit Jain wrote 4 months ago: ज़िंदगी सियाह है ज़रा तुम नूर थाम लो भरी … more »
