ग़ज़लो की दीवानी आज कल पग पग निशानी मैं बस ग़ज़ल सोचती जाउ किसी पल तुम देखो मुझको मैं बस ग़ज़ल तलाशती पाउ | ना जाने ये कैसा खुमार है मुझे इससे कब इनकार है ग़ज़ल बन रहा मेरा जीवन मुझे इ… more →
mehekmehhekk wrote 1 year ago: ग़ज़लो की दीवानी आज कल पग पग निशानी मैं बस ग़ज़ल सोचती जाउ किसी पल तुम देखो मुझको मैं बस ग … more →