देखना जज़्बे मोहब्बत का असर आज की रात मेरे शाने पे है उस शोख़ का सर आज की रात नूर ही नूर है किस सिम्त उठाऊं आँखें हुस्न ही हुस्न है ता हद-ए-नज़र आज की रात नग़मा-ओ-मै का ये तूफ़ान-ए-तरब क्या कहना मेरा घर बन… more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 2 years ago: देखना जज़्बे मोहब्बत का असर आज की रात मेरे शाने पे है उस शोख़ का सर आज की रात नूर ही नूर है किस सिम्त … more →