अगर हर दिन की लट्ठमार से ऊबे हुए हैं, जबर्दस्ती थोपे जा रहे संस्कारों से घुटन महसूस कर रहे हैं, कानून की परवाह न करने वालों से परेशान हैं, अपनी मनमानी करके खुद को सबका भाग्यविधाता समझने वालों से परेशा… more →
चौराहाchauraha wrote 10 months ago: अगर हर दिन की लट्ठमार से ऊबे हुए हैं, जबर्दस्ती थोपे जा रहे संस्कारों से घुटन महसूस कर रहे हैं, कानू … more →
chauraha wrote 11 months ago: बीजेपी ये दिखाने की कोशिश में काफी शांत है कि कल्याण के जाने से उसे कोई फर्क नहीं पड़ा है. सियासत की … more →
chauraha wrote 1 year ago: ये बात समझने की कोशिश में सिर खपा कर भी कुछ ख़ास समझ नहीं आया। लिहाजा थके हारे ये निष्कर्ष निकाला कि … more →
chauraha wrote 1 year ago: धमाके होने पर भी अगर देश के गृहमंत्री को तीन घंटे में तीन बार कपड़े बदलने की चिंता ज्यादा हो तो ये स … more →
chauraha wrote 1 year ago: रविवार को अरुण जेटली की प्रेस कांफ्रेंस की जानकारी मिलते ही दिमाग में एक साथ कई सवाल कौंध गए। पहली ब … more →
chauraha wrote 1 year ago: सिलसिलेवार धमाके, सीरियल ब्लास्ट ये शब्द आम हिंदुस्तानियों के लिए उतने ही आम हो चले हैं जितना मोगादि … more →
chauraha wrote 1 year ago: इस देश का अपना अलग शास्त्र है। इसमें विचित्रता है, एकरसता है, बहुत कुछ है। यहां गणेशजी दूध पीते हैं … more →
chauraha wrote 1 year ago: बहुत छोटे थे हम जब शाहबानों मामले में कांग्रेस ने अपना धर्म निरपेक्ष चोला उतार फेंका था। उस ग़लती के … more →