Blogs about: Deshboard

सम्मान और अपमान-हिन्दी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: उन्हें और क्या चाहिये जिनका दौलत करती हो सम्मान। तलवे चाटने के लिये कुछ पल मिल उनके पांव मिलने पर लो … more →

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श्रीलंका क्रिकेट टीम के घायल खिलाड़ियों का खेल जीवन खतरे में पड़ सकता है-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: कल लाहौर में श्रीलंका क्रिकेट टीम पर हमले के बाद बहुत कम लोगों ने इस बारे में सोचा है कि उसके घायल ख … more →

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भ्रष्ट पात्र किसी कहानी में में केन्द्रीय पात्र क्यों नहीं होता -आलेख

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: स्वतंत्रता के बाद देश का बौद्धिक वर्ग दो भागों में बंट गया हैं। एक तो वह जो प्रगतिशील है दूसरा वह जो … more →

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पब में पीने से शराब कोई अमृत नहीं हो जाती -हास्य कविता1 comment

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: नयी धोती, कुरता और टोपी पहनकर बाहर जाने को तैयार हुए कि आया फंदेबाज और बोला ‘दीपक बापू अच्छा हुआ तै … more →

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पड़ौस पर हमला न करो यह तो डाइन भी सिखाती-व्यंग्य कविता1 comment

दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: डाइन भी सात घर छोड़कर कहर बरपाती अपने पडौस से निभाओ यह तो वह भी सिखाती उसकी राह पर चलने वाले असली … more →

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सहमा शब्द -हिन्दी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: जब बमों की आवाज से शहर काँप जाते हैं बाज़ार में सड़कों पर फैले खून के दृश्य आखों के सामने आते हैं तब … more →

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महिला बुद्धिजीवी सम्मेलन-हास्य व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: सम्मेलनों के आयोजने करने के आदी लोगों की संस्था के पदाधिकारियों के  दिमाग  में ‘बुद्धिजीवी महिला सम् … more →

Tags: अभिव्यक्ति, अर्थशास्त्र, आलेख, कला, मस्तराम, समाज, साहित्य, हास्य, हिन्दी

आठ साल की बच्ची का हाथ कैसे कुचला जा सकता है-आलेख 3 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आज श्री सुरेश चिपलूनकर जी ने कुछ फोटो की श्रृंखला भेजी जिसने मेरा मन विचलित कर दिया। वह अकेले ऐसे ब् … more →

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हमने भी कुछ खोया नहीं-हिन्दी शायरी 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अपनी राह चलते जाना है कहीं फूल बरसेंगे तो कहीं लोग ताने कसेंगे थोड़ी खुशी के लिये बहुत दूर तक ढूंढते … more →

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जो बडे हैं वह कभी संयम नहीं गंवाते-हास्य कविता 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आया फंदेबाज और बोला ”क्या दीपक बापू हम तो समझते थे कोई भारी भरकम लेखक को पर हम अब समझे हमें भर … more →

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रहीम के दोहे:कलारी वाले के हाथ में दूध भी मदिरा लगता है2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: रहिमन नीचन संग बसि, लगत कलंक न काहि दूध कलारी कर गाहे, मद समुझै सब ताहि कविवर रहीम का कथन है कि नीच … more →

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जहाँ ले जाता मन-कविता साहित्य 4 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: दिल में हो कड़वाहट तो मीठा कैसे लिखें उदासी हो दिल में, चेहरे से हँसते कैसे दिखें कितना कठिन अपने को … more →

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महिला जाग्रति के लिए-हास्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: प्रदूषण पर आयोजित कार्यक्रम में वह विद्वान बोल रहे थे ”घर से कितना भी सजकर सड़क पर खुले में ज … more →

Tags: कला, कविता, ज्ञान, व्यंग्य, शायरी, शेर, समाज, साहित्य, हास्य व्यंग्य

रहीम के दोहे:जहाँ ईर्ष्या की गाँठ है वहाँ आनंद रस नहीं

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जहाँ गाँठ तहँ रस नहीं, यह रहीम जग होय मंड़ए तर की गाँठ में, गाँठ गाँठ रस होय कविवर रहीम कहते हैं कि … more →

Tags: अभिव्यक्ति, आलेख, समाज, साहित्य, हिन्दी, Blogging, Blogroll, Deepak bharatdeep, dohe

मनुस्मृति:अपराधियों को अनदेखा न करे राज्य

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १.अपनी क्षीण वृति, अर्थात आय की कमी से तंग होकर जो व्यक्ति रास्ते में पड़ने वाले खेत से कुछ कंद … more →

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ब्लोगर लेखक और लेखक ब्लोगर (3)

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मैं पिछले कई दिनों से लगातार देख रहा हूँ कि कुछ लोग अपने साथ कोई लेबल लगा कर रहना चाहते हैं. यह मानव … more →

Tags: अभिव्यक्ति, आलेख, कला, व्यंग्य, समाज, साहित्य, हास्य, हास्य व्यंग्य, Blogging

चाणक्य नीति:संतान को शिक्षा न देने वाले माता-पिता शत्रु के समान

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १.इस संसार में कुछ प्राणियों के किसी विशेष अंग में विष होता है-जैसे सर्प के दांतों में मक्खी के मस … more →

Tags: arthshastra, अध्यात्म, अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, कला, चाणक्य नीति, ज्ञान, समाज

चाणक्य नीति:परिवार का सुख उसके स्वरूप पर निर्भर

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १.सुखद गृहस्थी और परिवार की सुख समृद्धि इस बात पर निर्भर करती है की परिवार का स्वरूप कैसा है. जहाँ प … more →

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विकास यानि वाहनों की चौडाई बढना सड़क की कम होना 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: बहुत समय से देश के विकास होने के प्रचार का मैं टीवी चैनलों और अख़बारों में सुनता आ रहा हूँ. तमाम त … more →

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