दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: रहिमन राज सराहिए ससिसम सुखद जो होय कहा वापुरी भानु है, तपैं तरैवन खोय कविवर रहीम कहते है की उसी राज … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: पढ़ै गुनै सीखै सुनै, मिटी न संसे सूल कहैं कबीर कासों कहूं, ये ही दुख का मूल संत शिरोमणि कबीरदास जी क … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मान सहित विष खाय के, संभु जगदीस बिना मान अमृत पिये, राहु कटायी सीस कविवर रहीम कहते हैं कि सम्मान के … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १.जो नीच प्रवृति के लोग दूसरों के दिलों को चोट पहुचाने वाले मर्मभेदी वचन बोलते हैं, दूसरों की बुराई … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: भिक्षामप्युदपात्रं वा सत्कृत्य विधिपूर्वकम् वेदतत्त्वर्थविदूषे, ब्राहणानापादयेत, यदि अपने घर में खाद … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: दैवतान्यभिगच्छेत्तु धार्मिकांश्च द्विजोत्तमान् ईश्वरं चैव रक्षार्थ गुरूदेव च पर्वसु अपनी रक्षा तथा क … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: यद्ध्यायति यतकुरुते धृतिं बध्नाति यत्र च तद्वाप्नोत्ययत्नेन यो हिनस्ति न किञ्चन ऐसा व्यक्ति जो किस … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: इंद्रिवाणां प्रसङगेन दोषमृच्छ्रत्यसंशयम् सन्न्यिम्य तु तान्येव ततः सिद्धिं निगच्छति इस विश्व में सभ … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1.ऐसा व्यक्ति अविश्वसनीय होता है जो क्रुद्ध होने पर सारे भेद देता है। ऐसा व्यक्ति कदापि म … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जो नीच प्रवृति के लोग दूसरों के दिलों को चोट पहुचाने वाले मर्मभेदी वचन बोलते हैं, दूसरों की बुराई … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1.संसार में किसी को भी मनचाहा सुख प्राप्त नहीं होता। सामान्यत: सुख-दुख के प्राप्ति मनुष्य के हाथ मे … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1.ईर्ष्या असफलता का दूसरा नाम है। अपनी असफलता और दूसरे की सफलता से मनुष्य ईर्ष्यालु हो जाता। ईर्ष्या … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: बुद्धिमान व्यक्ति को चाहिए कि वह अपने धन की हानि, अपने मानसिक संताप, अपने घर-परिवार के सदस्यों के द … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: रहिमन रीति सराहिए, जो घाट सुन सम होय भांति आप पै डारी के, सबै पियावै तोय कविवर रहीम कहते हैं कि कलश … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १.इतने भारी शरीर वाला हाथी छोटे से अंकुश सा वश में किया जाता है. सब जानते हैं की अंकुश परिमाण में हा … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1.दूसरों से गाली सुनकर भी स्वयं उन्हें गाली न दे। क्षमा करने वाले का रोका हुआ कोर्ध ही गाली देने वा … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: गिरिये परवत शिखर ते, परिये धरनि मंझार मूरख मित्र न कीजिए, बूडो काली धार संत शिरोमणि कबीरदास जी कहत … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १.सोचना है तो घटिया नहीं कोई ऊंची बात सोचो. २.ऊपर उठने का हमेशा यत्न करो. ३.निगाहें उठाओं तो ऊपर के … more →