वह एक ब्राह्म्ण लेखक का पाठ था-ऐसा उन्होंने अपने पाठ में स्वयं ही बताया था। उसने बताया कि राजस्थान के सीमावर्ती गांवों में विभाजन के समय आये सिंधी किस तरह अपनी संस्कृति को संजोये हुए हैं। एक सिंधी ने … more →
दीपक भारतदीप की शब्दलेख-पत्रिकादीपक भारतदीप wrote 2 months ago: वह एक ब्राह्म्ण लेखक का पाठ था-ऐसा उन्होंने अपने पाठ में स्वयं ही बताया था। उसने बताया कि राजस्थान क … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: रहिमन राज सराहिए ससिसम सुखद जो होय कहा वापुरी भानु है, तपैं तरैवन खोय कविवर रहीम कहते है की उसी राज् … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: पढ़ै गुनै सीखै सुनै, मिटी न संसे सूल कहैं कबीर कासों कहूं, ये ही दुख का मूल संत शिरोमणि कबीरदास जी क … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मान सहित विष खाय के, संभु जगदीस बिना मान अमृत पिये, राहु कटायी सीस कविवर रहीम कहते हैं कि सम्मान के … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १.जो नीच प्रवृति के लोग दूसरों के दिलों को चोट पहुचाने वाले मर्मभेदी वचन बोलते हैं, दूसरों की बुराई … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: भिक्षामप्युदपात्रं वा सत्कृत्य विधिपूर्वकम् वेदतत्त्वर्थविदूषे, ब्राहणानापादयेत, यदि अपने घर में खाद … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: दैवतान्यभिगच्छेत्तु धार्मिकांश्च द्विजोत्तमान् ईश्वरं चैव रक्षार्थ गुरूदेव च पर्वसु अपनी रक्षा तथा क … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: यद्ध्यायति यतकुरुते धृतिं बध्नाति यत्र च तद्वाप्नोत्ययत्नेन यो हिनस्ति न किञ्चन ऐसा व्यक्ति जो किसी … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: इंद्रिवाणां प्रसङगेन दोषमृच्छ्रत्यसंशयम् सन्न्यिम्य तु तान्येव ततः सिद्धिं निगच्छति इस विश्व में सभी … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1.ऐसा व्यक्ति अविश्वसनीय होता है जो क्रुद्ध होने पर सारे भेद देता है। ऐसा व्यक्ति कदापि मित्रता के य … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जो नीच प्रवृति के लोग दूसरों के दिलों को चोट पहुचाने वाले मर्मभेदी वचन बोलते हैं, दूसरों की बुराई कर … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1.संसार में किसी को भी मनचाहा सुख प्राप्त नहीं होता। सामान्यत: सुख-दुख के प्राप्ति मनुष्य के हाथ में … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1.ईर्ष्या असफलता का दूसरा नाम है। अपनी असफलता और दूसरे की सफलता से मनुष्य ईर्ष्यालु हो जाता। ईर्ष्या … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: बुद्धिमान व्यक्ति को चाहिए कि वह अपने धन की हानि, अपने मानसिक संताप, अपने घर-परिवार के सदस्यों के दो … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: रहिमन रीति सराहिए, जो घाट सुन सम होय भांति आप पै डारी के, सबै पियावै तोय कविवर रहीम कहते हैं कि कलश … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १.इतने भारी शरीर वाला हाथी छोटे से अंकुश सा वश में किया जाता है. सब जानते हैं की अंकुश परिमाण में हा … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1.दूसरों से गाली सुनकर भी स्वयं उन्हें गाली न दे। क्षमा करने वाले का रोका हुआ कोर्ध ही गाली देने वाल … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: गिरिये परवत शिखर ते, परिये धरनि मंझार मूरख मित्र न कीजिए, बूडो काली धार संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १.सोचना है तो घटिया नहीं कोई ऊंची बात सोचो. २.ऊपर उठने का हमेशा यत्न करो. ३.निगाहें उठाओं तो ऊपर के … more →