विनय wrote 1 year ago: शबनमी सर्द रात है और ख़्याल तेरा चाँद तन्हा मैं तन्हा और ख़्याल तेरा सबसे छुपाया पर छुपा न राज़े-मोहब … more →
विनय wrote 1 year ago: शबनम यूँ सुलगी रात सोते पत्तों पर जैसे वह मुझको मिले और मिले भी ना चाँद खिड़की पर बैठकर मुझे देखता ह … more →
विनय wrote 1 year ago: तन्हाई यूँ ढूँढ़ती है मुझे जैसे मेरी सदा तुम्हें जो दीवारें ख़ुद-ब-ख़ुद गिरती हैं मैं कैसे चुनावाऊँ … more →
विनय wrote 1 year ago: गुनचे चाँदनी देखकर मुस्कुराने लगे महक उठी रिदा यह चाँदनी की… शबनमी रात और भी हसीन हो गयी है शा … more →
विनय wrote 1 year ago: रोज़े – शामे – दीवाली कोई नूरे – चराग़ नहीं चौखट सूनी दिल वीराँ तन्हा - … more →
विनय wrote 2 years ago: It was a beautiful dusk When I was at my threshold And waiting for Opening of your door Moon was mov … more →