Blogs about: Dew
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खिली-खिली महकी बहारें हैं
खिली-खिली महकी बहारें हैं झीलों पर बहते शिकारें हैं ठण्डी-ठण्डी सौंधी हवाएँ … more »
तख़लीक़-ए-नज़र
खिली-खिली महकी बहारें हैं
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विनय प्रजापति wrote 5 days ago: खिली-खिली महकी बहारें हैं झीलों पर बहत … more »
शबनमी सर्द रात है और ख़्याल तेरा
विनय प्रजापति wrote 1 month ago: शबनमी सर्द रात है और ख़्याल तेरा चाँद … more »
शबनम यूँ सुलगी रात सोते पत्तों पर
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: शबनम यूँ सुलगी रात सोते पत्तों पर जैसे … more »
तन्हाई यूँ ढूँढ़ती है मुझे
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: तन्हाई यूँ ढूँढ़ती है मुझे जैसे मेरी स … more »
ज़ीनत
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: गुनचे चाँदनी देखकर मुस्कुराने लगे मह … more »
ख़ाली सीने में कुछ धुँआ-धुँआ-सा है
विनय प्रजापति wrote 4 months ago: ख़ाली सीने में कुछ धुँआ-धुँआ-सा है जिस … more »
रोज़े-शामे-दीवाली कोई नूरे-चराग़ नहीं
विनय प्रजापति wrote 4 months ago: रोज़े - शामे - दीवाली कोई नूरे - चराग़ न … more »
