के अनुसार ———————– आस्रावयेदुपचितान् साधु दुष्टऽव्रणनि। आमुक्तास्ते च वतैरन् वह्मविव महीपती।। हिंदी में भावार्थ-दुष्ट व्रणों की तरह पके हुए धन से संपन्न… more →
*** दीपक भारतदीप की हिंदी सरिता-पत्रिका*** mastram Deepak Bharatdeep ki hindi patrika***दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: के अनुसार ———————– आस्रावयेदुपचितान् साधु दुष्टऽव्रण … more →