समाज में ज्योतिष का प्रभाव वैदिक काल से ही रहा है. वैदिक युग में मानव ने ज्योतिष सहित प्रत्येक ज्ञान को आम जन की भलाई के लिए ही प्रयोग किया. कुछ आसुरी प्रवृत्ति के लोगो ने इस ज्ञान का दुरुपयोग किया तो… more →
ज्योतिष की सार्थकताpanditastro wrote 8 months ago: समाज में ज्योतिष का प्रभाव वैदिक काल से ही रहा है. वैदिक युग में मानव ने ज्योतिष सहित प्रत्येक ज्ञान … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1. मनुष्य का शरीर रथ है, बुद्धि सारथि और इंद्रियां घोड़े है। इनको सावधानी से नियंत्रण करने वाला ही … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: सहज तराजू आनि के, सब रस देखा तोल सब रस माहीं जीभ रस, जू कोय जाने बोल संत शिरोमणि कबीर दास जी कहते है … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: चतुराई क्या कीजिए, जो नहिं शब्द समाय कोटिक गुन सूवा पढै, अन्त बिलाई खाय संत शिरोमणि कबीरदास जी कह … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: चाल बकुल की चलत हैं, बहुरि कहावैं हंस ते मुक्ता कैसे चुंगे, पडे काल के फंस संत शिरोमणि कबीरदास जीं … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १. जो पुरुष वाणी में कठोरता दिखाता है उससे लोग उतेजित होते हैं यह अनर्थकारी है, इसलिए ऐसी … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जौन चाल संसार के जौ साधू को नाहिं डिंभ चाल करनी करे, साधू कहो मत ताहिं संत शिरोमणि कबीरदास जीं कहते … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: ‘कबीर’ मन फूल्या फिरै,करता हूँ मैं प्रेम कोटि क्रम सिरि ते चल्या, चेत न देखै भ्रम संत … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: क्रिकेट,फिल्म,राजनीति और और पत्रकारिता का क्षेत्र समाज में आकर्षण का केंद्र होते हैं … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: देवराज इंद्र द्वारा राजा हरिश्चन्द्र के पुत्र रोहित को उपदेश के रुप में संस्कृत में दिए गये श्लोक का … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: हम सारा दिन किसी न किसी काम में लगे रहने का प्रयास करते हैं, क्योंकि अपने जी … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: जब सामान्य आदमी के मन में हलचल होती है वह उसे शांत करने के लिए किसी ज्ञानी … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: वैज्ञानिकों ने आसमान एक धरती का अस्तित्त्व खोज निकाला है, उनके दावों पर … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: मैं क्यों लिखता हूँ , मुझे नहीं मालुम ! अब सवाल भी अपने से है जवाब भी स्वयं … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: मैं देश में चल रहे माहौल को जब देखता हूँ जिसमें हिदू धर्म के प्रति लोगों के मन मे … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: भारत में आजकल एक फैशन हो गया है कि अगर आपको सस्ती लोकप्रियता प्राप्त करनी हो … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: घर से निकलकर मैं चौराहे पर यह सोचकर पहुंचा कि लोगों को अपना दर्द और व्यथाएं सुनाऊंगा और वह बडे प्या … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: राजनीति वह व्यापार है जिसमें गरीबी, बेकारी भ्रष्टाचार और भुखमरी का दर्द बेचा जाता दर्द के इलाज का … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: अगर हम घर में लगातार बैठे रहते हैं तो एक समय ऐसा आ जाता है कि हमें बोरियत होने लगती है। हमें लगता है … more →