हर एक घर में दीया भी जले अनाज भी हो, अगर न हो कही ऐसा तो एहतराज़ भी हो, हुकुमतो को बदलना तो कुछ मुहाल नही, हकुमाते जो बदलता है वह समाज भी हो, रहेगी कब तलक वादों में क़ैद खुशहाली, हर एक बार ही कल क्यों … more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामpryas wrote 1 year ago: तुम भूल जाओ या याद रखो, कोई आयेगा इसकी आस रखो. धूप में पिघल जायेंगे सपने, जुल्फों की छाँव पास रखो. ह … more →
mehhekk wrote 1 year ago: दुनिया की भीड़ में खुद को ढालना ज़रूरी होता है दो पल बैठ किनारे कभी खुद से मिलना ज़रूरी होता है … more →
mehhekk wrote 1 year ago: धूप का रेशमी टुकड़ा दिन की पहली प्रहर में कोई दस्तक सुनाई दी झरोखे से देखा छुपकर वो खड़ा था मेरी दह … more →
mehhekk wrote 1 year ago: फूलों से रंग और महकती मधु बूंदे हर सुबह नज़रों से बिन भूले पिये जा | फिर भंवरे के जैसी मीठी गुंजन कर … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: हर एक घर में दीया भी जले अनाज भी हो, अगर न हो कही ऐसा तो एहतराज़ भी हो, हुकुमतो को बदलना तो कुछ मुहा … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: तेरी आँखों से ही जागे सोये हम कब तक आखिर तेरे ग़म को रोये हम वक्त का मरहम ज़ख़्मों को भर देता है , श … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: बेनाम सा ये दर्द ठहर क्यों नही जाता, जो बीत गया है वो गुज़र क्यों नही जाता, सब कुछ तो है क्या ढूंढती … more →
Amarjeet Singh wrote 6 years ago: बॉलीवुड में राष्ट्रप्रेम पर आधारित फिल्में वर्षों से बनती आ रही हैं। पिछले दिनों राजधानी के अशोक होट … more →