धुआं बनाके फिजां में उड़ा दिया मुझको, मैं जल रहा था किसी ने बुझा दिया मुझको, खड़ा हूँ आज भी रोटी के चार हर्फ़ लिए, सवाल ये है किताबों ने क्या दिया मुझको, सफेद रंग की चादर लपेट कर मुझ पर, फसीने शहर से … more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 1 year ago: धुआं बनाके फिजां में उड़ा दिया मुझको, मैं जल रहा था किसी ने बुझा दिया मुझको, खड़ा हूँ आज भी रोटी के … more →