हमने आसमाँ से टूटके गिरते सितारे को ज़मीं पे आते देखा है आसमाँ पे था तो चमकता था ज़मीं पे है तो दहकता है फ़र्क़ है बस थोड़ा-सा ‘कितना है?’ इतना है! जाओ उठा लाओ उसे… शायिर: विनय प्रजापति … more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: हमने आसमाँ से टूटके गिरते सितारे को ज़मीं पे आते देखा है आसमाँ पे था तो चमकता था ज़मीं पे है तो दहकता … more →