दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई जैसे अहसान उतारता है कोई। आईना दिख के तसल्ली हुई हमको इस घर में जानता है कोई। फक गया है सज़र पे फल शायद फिर से पत्थर उछालता है कोई। फिर नज़र में लहू के छींटे हैं तुमको शायद… more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 2 years ago: दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई जैसे अहसान उतारता है कोई। आईना दिख के तसल्ली हुई हमको इस घर में जानता है … more →