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भर्तृहरि नीति शतक-धन की ऊष्मा से रहित मनुष्य क्या रह जाता है (heat of money-hindu sandesh)

दीपक भारतदीप wrote 4 weeks ago: भर्तृहरि महाराज कहते हैं कि  ————————— … more →

Tags: अध्यात्म, अनुभूति, आलेख, कला, चिंतन, दीपक भारतदीप, मस्त राम, सन्देश, समाज

संत कबीर के दोहे-कष्ट और कलह की जड़ है गाली देना (gali dena galat-kabir ke dohe

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: आवत गारी एक है, उलटत होय अनेक। कहैं कबीर नहिं उलटिये, वही एक की एक।संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं क … more →

Tags: अध्यात्म, अनुभूति, अभिव्यक्ति, कबीर, कला, मस्तराम, समाज, हिंदी पत्रिका, हिन्दी

संत कबीर वाणी-दीनानाथ तो निराधार के ग्राहक हैं

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: चतुराई हरि ना मिलै, ए बातां की बात एक निस प्रेमी निराधार का गाहक गोपीनाथ संत कबीरदास जी का आशय यह है … more →

Tags: writer, हिंदी आलेख, Hindi writing, Deepak bharatdeep, दीपक भारतदीप, web bhaskar, web jagran, web panjab kesri, web sindh kesri

संत कबीर वाणी-मूर्ख लोग सभी की पीड़ा एक समान नहीं मानते

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: पीर सबन की एकसी, मूरख जाने नांहि अपना गला कटाक्ष के , भिस्त बसै क्यौं नांहि संत शिरोमणि कबीरदास जी क … more →

Tags: alekh, आलेख, चिंतन, दीपक भारतदीप, मस्त राम, मस्तराम, bharat, Deepak bharatdeep, dharm

संत कबीर वाणीः अच्छा खाने को मिले तो भी बेवकूफ की संगत न करें

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: कबीर संगत साधु की, जौ की भूसी खाय खीर खीड भोजन मिलै, साकट संग न जाय संत कबीर दास जी कहते हैं कि साधु … more →

Tags: हिन्दी, चिंतन, अभिव्यक्ति, jagran, India, सन्देश, हिन्दू, अनुभूति, Deepak bharatdeep

संत कबीरदास के दोहे-भगवान के साथ चतुराई मत करो1 comment

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: सिहों के लेहैंड नहीं, हंसों की नहीं पांत लालों की नहीं बोरियां, साथ चलै न जमात संत शिरोमणि कबीर दास … more →

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कबीर के दोहे: विवेकहीन को अच्चे बुरे की पहचान नहीं होती 2 comments

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: फूटी आँख विवेक की, लखें न संत असतं जिसके संग दस बीच हैं, ताको नाम महंत संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते ह … more →

Tags: हिन्दी, चिंतन, अध्यात्म, अभिव्यक्ति, hindu, dharm, darshan, India, सन्देश

कबीर के दोहे-तारा मंडल की बैठक में चंद्रमा पाता है इज्जत

दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि ———————— तारा मण् … more →

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रहीम संदेश: जिंदगी में समय का बहुत महत्व है 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: समय लाभ सम लाभ नहिं, समय चूक सम चूक चतुरन चित रहिमन लगी, समय चूक की हूक कविवर रहीम कहते हैं कि समय ह … more →

Tags: अभिव्यक्ति, आध्यात्म, हिन्दी, Deepak bapu, Deepak bharatdeep, hindi abhivyakti, hindi adhyatm, hindi bhasha, hindi chating

रहीम के दोहे:राम का नाम जपने वालों को विषय नहीं घेरते

दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: रहिमन राम न उर धरै, रहत विषय लपटाय पसु खर खात सवाद सों, गुर बुलियाए खाय कविवर रहीम कहते है कि भगवान … more →

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कबीर के दोहे:दो मुखों से काम करने पर पड़ता है थप्पड़

दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: जौ मन लागै एक सों, तो निरुवारा जाय तूरा दो मुख बाजता, घना तमाचा खाय संत श्री कबीरदास जी कहते हैं अगर … more →

Tags: Blogroll, hindi Personal, Hindu darshan, Hindu culture, bharat, hindu dharm, web duniya, Kabir, hindi shabd

रहीम के दोहे: भ्रम में पड़कर पैसा मत गंवाओ

दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: संपति भरम गंवाइ के, हाथ रहत कछु नाहिं ज्यों रहीम ससि रहत है, दिवस अकासहिं मांहि कविवर रहीम कहते हैं … more →

Tags: hindi Personal, Hindi Education, Hindi online journalism, Hindi Darshan, Hindu darshan, Hindu culture, web duniya, hindi adhyatm, web dunia

रहीम सन्देश: प्रेम और सम्मान में धीरे धीरे होती है बढोतरी

दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: रहिमन अति न कीजिए, गहि रहिए निज कानि सैंजन अति फूलै तऊ, डार पात की हानि कविवर रहीम कहते हैं कि कभी भ … more →

Tags: Blogroll, Hindi Darshan, Hindu darshan, Hindu culture, India, bharat, hindu dharm, hindi duniya, web duniya

संत कबीर संदेशः उपदेश देने से क्या लाभ जब सुनने वाले का दिमाग घर में न हो 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: संत शिरोमणि कबीरदास जी के अनुसार ————————— … more →

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रहीम संदेशः अच्छी नीयत से काम करें तो मनुष्य क्या परमात्मा मिल जाते हैं1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: <strong>रहिमन मनहि लगाईं कै, देखि लेहू किन कोय नर को बस करिबो कहा, नारायन बस होय</strong … more →

Tags: Hindi writing, web duniya, hindi megzine, web dunia, web jagaran, web bhasakar, web nai duniya, Deepak bharatdeep, हिंदी

व्ही.आई.पी. कहलाने की चाहत-हास्य व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: वैसे तो अपने देख के लोगों की यह पूरानी आदत है कि वह हर तरफ अपने को श्रेष्ठ साबित करना चाहते हैं और अ … more →

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संत कबीर संदेशः खोटी मनोवृत्ति के लोगों के सामने अपने रहस्य न खोलें

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: हीरा तहां न खोलिए,जहां खोटी है हाट कसि करि बांधो गठरी, उठि चालो बाट संत शिरोमणि कबीर दास जी कहते हैं … more →

Tags: हिन्दी, abhivyakti, Internet, Kabir, Friends, dharm, hindu, bharat, India

रहीम के दोहेःसेवक खरीदा तो समझो मालिक खरीद लिया

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मन से कहां रहीम प्रभु, दृग सों कहां दीवान देखि दृगन जो आदरै, मन तोहि हाथ बिकान कविवर रहीम कहते हैं क … more →

Tags: Hindi writing, web duniya, hindi megzine, web dunia, web jagaran, web bhasakar, web nai duniya, Deepak bharatdeep, हिंदी पत्रिका

संत कबीर वाणीः किसी काम के नहीं हों तो ऊंचे आदमी होने से क्या लाभ1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जोरे बड़ मति नांहि जैसे फूल उजाड़ को, मिथ्या हो झड़ जांहि संत शिरोमणि कबीरदास … more →

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