मुझसे बिछड़ के खुश रहते हो, मेरी तरह तुम भी झूठे हो, इक टहनी पर चाँद टिका था, मैंने ये समझा तुम बैठे हो, उजले उजले फूल खिले थे, बिल्कुल जैसे तुम हँसते हो, मुझ को शाम बता देती है, तुम कैसे कपड़े पहने ह… more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 2 years ago: मुझसे बिछड़ के खुश रहते हो, मेरी तरह तुम भी झूठे हो, इक टहनी पर चाँद टिका था, मैंने ये समझा तुम बैठे … more →