हम घर से बाहर निकल कर जैसे सायकल से सड़क पर आये तो एक सज्जन मिल गये और हमसे बोले-‘कहां जा रहे हो।’ हमने कहा-‘पुतले और पुतली का खेल देखने जा रहे हैं।’ वह बोले-‘‘कहां जा रहे हो? हमें भी बताओ। अरसा हो … more →
** दीपक भारतदीप की अमृत संदेश-पत्रिका** Mastram Deepak Bharatdeep's Hindi express patrikaK M Mishra wrote 7 months ago: =>नाच मेरी बुलबुल तुझे पैसा मिलेगा, ऐसा कदरदान तुझे कहां मिलेगा । =>मैं इतना ज़ोर से नाची आज, क … more →
K M Mishra wrote 1 year ago: Mera Apna Pushpak Viman यह हास्य नाटक एक ऐसे इंसान की कहानी है जो चलता साइकिल पर है लेकिन सपने प्राइ … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: हम घर से बाहर निकल कर जैसे सायकल से सड़क पर आये तो एक सज्जन मिल गये और हमसे बोले-‘कहां जा रहे हो।’ … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: I have some lessons to the Blog English translation in Hindi to read them. It is also written by Ind … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: My wife has asked the night -”What will eat?” We have said -”Where we eat at night … more →