खुदा-ए-अज़ीज तेरे दर पे एक ही बड़ी चादर चढ़ाउँ तो काफ़ी होगी न वक़्त के साथ तुझसे माँगनेवालों की दुआओं की फेहरिस्त लंबी होगी |… more →
mehekmehhekk wrote 1 year ago: खुदा-ए-अज़ीज तेरे दर पे एक ही बड़ी चादर चढ़ाउँ तो काफ़ी होगी न वक़्त के साथ तुझसे माँगनेवालों की दुआ … more →
mehhekk wrote 1 year ago: हजीअली -मेरे मौला चादर-ओ -फलक से कीमती शामियाँ सजाऊँ पहुंचे तुझ तक इबादत -ऐ -सफर दरमियाँ बनाऊँ | ज़ि … more →
mehhekk wrote 1 year ago: फूलों से रंग और महकती मधु बूंदे हर सुबह नज़रों से बिन भूले पिये जा | फिर भंवरे के जैसी मीठी गुंजन कर … more →
mehhekk wrote 1 year ago: खुदा तेरी खुदाई की कसम जूस्तजू है अदब से एक बार रूबरू करा दे यार से एक बार | रास्ते में टकराए है उनस … more →