काश कुछ ऐसा होता सोचती हूँ काश कुछ ऐसा होता सब कुछ जैसा मैं चाहूं , वैसा होता | जब मन में कोई ख्वाहिश पनपति पलक झपकने से पहले परिपूर्ण होती | फिर ना ही मुझे किसीसे करना पड़ता इज़हार और ना ही करना होत… more →
mehekAshok wrote 1 year ago: कलम! जिस से मैं आज बरसों से अपने दिल की आवाज़ को लफ्जों मैं ढालता रहा हूँ , बहते हर आंसू को पोछता … more →
mehhekk wrote 1 year ago: काश कुछ ऐसा होता सोचती हूँ काश कुछ ऐसा होता सब कुछ जैसा मैं चाहूं , वैसा होता | जब मन में कोई ख्वाहि … more →