Technorati tags: dushyant, blog ban फिर धीरे-धीरे यहाँ का मौसम बदलने लगा है , वातावरण सो रहा था अब आँख मलने लगा है । पिछले सफ़र की न पूछो , टूटा हुआ एक रथ है , जो रुक गया था कहीं पर , फिर साथ चलने लगा… more →
यही है वह जगहअफ़लातून wrote 2 years ago: Technorati tags: dushyant, blog ban फिर धीरे-धीरे यहाँ का मौसम बदलने लगा है , वातावरण सो रहा था अब आ … more →
अफ़लातून wrote 2 years ago: [ पचखा ऐसी अशुभ और मनहूस अवधि होती है कि उसमें मट्टी (लाश) फूँकना भी अशुभ होता है । कल गंगा दशहरा क … more →