जरुरतों की शयों का रोज शक्ल बदलना दौलत के पहाड़ पर इंसानों की चाहतों का चढ़ना तरक्की का यह पैमाना नहीं होता। इंसानों के जज़्बातों की उम्र समय के साथ न बदलती हो ख्यालों का चैहरा भी हालातों के साथ नया नज़र… more →
दीपक भारतदीप की शब्द- पत्रिकादीपक भारतदीप wrote 1 month ago: जरुरतों की शयों का रोज शक्ल बदलना दौलत के पहाड़ पर इंसानों की चाहतों का चढ़ना तरक्की का यह पैमाना नहीं … more →
दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: इस देश में कई ऐसे लोग है जो अमिताभ बच्चन के अभिनय और आवाज से अधिक उनके व्यक्तित्व और वक्तव्यों से अध … more →
दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: पता नहीं क्यों भारत के लेखकों और बुद्धिजीवियों एक तरफ से तो देशप्रेम से ओतप्रोत रहते हैं दूसरी तरफ अ … more →
दीपक भारतदीप wrote 12 months ago: प्रसिद्ध साहित्यकार श्री नरेंद्र कोहली ने भारत के अंग्रेजी लेखकों को विदेशी लेखकों के साथ ही भारत के … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: गुरुजी टूथपेस्ट कर रहे थे और खास चेला पास में खड़ा था। गुरुजी ने पूछा-‘बाहर की क्या खबर है?’ चेले ने … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कमेन्ट पाने का उसने कीर्तिमान बनाया जोश में आकर उसने लिखा अपनी प्रेयसी को प्रेम पत्र इकतरफा प्रेम ने … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: देश के बुद्धिजीवियों के लिये इस समय कुछ न कुछ लिखने के लिये ऐसा आ ही जाता है जिसमें उनको संकुचित ज्ञ … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: लंबा तगड़ा और आकर्षक चेहरे वाला वह लड़का शहर की फुटपाथ पर चला जा रहा था सामने एक सुंदर गौरवर्ण लडकी … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: बहुत दिन से हमारे दिमाग में यह बात नहीं आ रही कि आखिर कौन किसको क्या और क्यों समझा रहा है? कब समझा र … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: एक विचारक पहुंचा दूसरे के पास और बोला ‘यार आजकल कोई अपने पास नहीं आता है हमसे पूछे बिना यह समा … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कुछ लोग होते हैं पर कुछ दिखाने के लिये बन जाते लाचार अपनी वेदना का प्रदर्शन करते हैं सरेआम लुटते हैं … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: एक नया कवि मंच पर कविता सुनाने के लिये बुलाया गया तो उसने आते ही कहा‘,आज मैं अपनी एक कविता सुनाने जा … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: तीस हजार पाठक संख्या पार कर चुके इस ब्लाग/पत्रिका ने अपने संपादक के अन्य ब्लाग पत्रिकाओं के अलावा मि … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: लोग आज इसे हिंदी दिवस कह रहे हैं पर एक हिंदी विद्वान का मत है कि इसे भारतीय भाषा दिवस के रूप में मना … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आज यह दूसरा ब्लाग/पत्रिका है जिसने 30 हजार पाठ/पाठक संख्या को पार किया। इससे पहले हिंदी पत्रिका ने इ … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जाति, धर्म, भाषा और वर्ण के आधार पर हमारे देश में अनेक वर्षों से संगठित समाज चले आ रहे हैं और इसकी आ … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: इस प्रथ्वी पर जीवन अपनी सहज धारा से बहता जाता है। अनेक आपदायें इस प्रथ्वी पर आती हैं पर फिर सब कुछ स … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जब जज्बातों में आता ठहराव तब शब्द खामोश हो जाते स्तब्ध मन सन्नाटे में ताकता है उस समय न सोचना अच्छा … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आज मेरा यह ब्लाग@पत्रिका पाठक संख्या 25 हजार पार कर गया। वेसे देखा जाये कि यह कोई बड़ी बात नहीं है। … more →