सागर किनारे तक आकर आलिंगन देती ल़हेरे आते वक़्त भर भरके तुम्हारी यादे समेट लाती है मेरे मन में उठते हुए हज़ारों ख़याली तूफ़ानो को बहुत दूर कही तो अपने साथ वापस ले जाती है गीली रेत पर तुम्हारा ना… more →
mehekmehhekk wrote 1 year ago: सागर किनारे तक आकर आलिंगन देती ल़हेरे आते वक़्त भर भरके तुम्हारी यादे समेट लाती है मेरे मन में उठत … more →
mehhekk wrote 1 year ago: नींद की लहरों में ख्वाबों के समंदर से उठ कर रौशनी की चाह जगाता हुआ चमचमाती चाँदनी शुभ्रा सा घुलता ह … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: हम दोस्ती एहसान वफ़ा भूल गए है, जिंदा तो है जीने की अदा भूल गए है, हम दोस्ती एहसान वफ़ा भूल गए है, खुश … more →