हम तुम अलग अलग दो तन एक मन बाहों में ये कंपन हमारी तुम्हारी बढ़ती धड़कन हम फूल तुम खुशबू इन फ़िज़ायों संग हो जाए रूबरू हम घटा तुम सावन आओ बरस जाए प्यासी धरती तृष्णा मिटाए हम दीप तुम बाति मिलकर जल जा… more →
mehhekk wrote 1 year ago: हम तुम अलग अलग दो तन एक मन बाहों में ये कंपन हमारी तुम्हारी बढ़ती धड़कन हम फूल तुम खुशबू इन फ़िज़ा … more →
Tags: Shayari, Kavita, Hindi Poem, rang, PYAR, mohobaat, Sher, Mehek, mehhekk
Follow this tag via RSS