एक पुराना मौसम लौटा याद भरी पुरवाई भी, ऐसा तो कम ही होता है वो भी हों तनहाई भी, यादों की बौछारों से जब पलकें भीगने लगती हैं, कितनी सौंधी लगती है तब माझी की रुसवाई भी, दो दो शक़्लें दिखती हैं इस बहके से… more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 2 years ago: एक पुराना मौसम लौटा याद भरी पुरवाई भी, ऐसा तो कम ही होता है वो भी हों तनहाई भी, यादों की बौछारों से … more →