विनय प्रजापति wrote 5 months ago: यक़ीनन तुम्हारे हुस्न पे लाखों मरते हो … more →
विनय प्रजापति wrote 6 months ago: कितने दिन हुए कोई टूटता सितारा नहीं दे … more →
विनय प्रजापति wrote 6 months ago: मैं अत्यन्त अकेला था अनन्त शून्य था मे … more →
विनय प्रजापति wrote 8 months ago: धीरे-धीरे उतरती है साँस सीने में यह दर … more →
विनय प्रजापति wrote 11 months ago: सौंधी हुई एक खु़शबू मेरी आँखों में आकर … more →