मेरे ही हाथों में टूटा है दम मेरा तेरे ही स्पर्श से तख़लीक़ हुआ है यह ‘विनय’… नया जन्म हुआ है तो नये अहसास भी होंगे अभी-अभी मेरी मुट्ठी में जन्मी है यह क़िस्मत खुलेगी जो कई और कई जीतों के जश्न भी … more →
तख़लीक़-ए-नज़रaglakadam wrote 1 month ago: This is a poem written by a teenager with cancer.She wants to see how many people get her poem. It i … more →
विनय wrote 2 years ago: मेरे ही हाथों में टूटा है दम मेरा तेरे ही स्पर्श से तख़लीक़ हुआ है यह ‘विनय’… नया जन्म हुआ है त … more →