जो दिल से जाता नहीं है तू वह गीत है जो दिल में आकर बसा था तू वह मीत है साँसों की सरगम बस तुम ही तुम लफ़्ज़ों में जब हम बस तुम ही तुम कहना कितना मुश्किल था यह समझा न सके अपने दिल की बात हम तुम्हें बता न … more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: जो दिल से जाता नहीं है तू वह गीत है जो दिल में आकर बसा था तू वह मीत है साँसों की सरगम बस तुम ही तुम … more →
विनय wrote 2 years ago: I’m not software To use that you can crack I’m strong enough Can hold this earth on my back You supp … more →
विनय wrote 2 years ago: क्या पाया और कितना पाया ज़िन्दगी से हमें कोई गिला नहीं सुना है जितना भी देता है खु़दा जीने के लिए मुन … more →