Lost your password?

Blogs about: Enternment

Featured Blog

विदुर नीति-अर्थ प्राप्ति के लिए धर्म का पालन करें (arth aur dharm-hindu adhyamik sandesh)

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: यस्यात्मा विरतः पापाद कल्याणे च निवेशितः। तेन स्र्वमिदं बुद्धम् प्रकृतिर्विकृतिश्चय वा।। हिंदी में भ … more →

Tags: हिन्दी, आलेख, संपादकीय, अध्यात्म, अभिव्यक्ति, jagran, editoriyal, dharm, bharat

कबीर के दोहे-अपनी सराहना स्वयं न करें (kabir darshan-dosron ke dosh)

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: आपन को न सराहिये, पर निन्दिये न नहिं कोय। चढ़ना लम्बा धौहरा, ना जानै क्या होय।। संत शिरोमणि कबीरदास ज … more →

Tags: arebic, अध्यात्म, अनुभूति, अभिव्यक्ति, चिंतन, दीपक भारतदीप, मस्त राम, हिन्दी, Deepak bharatdeep

कुछ भ्रम, कुछ सत्य- हिन्दी हास्य व्यंग्य ( Some confusion, some truth - Hindi comedy satire)

दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: इस देश में भ्रम भी सच की तरह बिकता है यह तो बहुत समय से देखते आ रहे है पर इस कदर विवेकवान और पढ़े लि … more →

Tags: व्यंग्य, हिन्दी, अभिव्यक्ति, अनुभूति, हास्य व्यंग्य, हिन्दी पत्रिका, मस्तराम, अध्यात्म, vyangya

पैसे के साथ इश्क में भी आ सकता है मंदी का दौर - हास्य व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: क्वीसलैंड यूनिवर्सटी आफ टैक्लनालाजी के प्रोफेसर कि अनुसार इस मंदी के दौर में लोगों के दाम्पत्य जीवन … more →

Tags: hindi journlism, hindi web, hindi epatrika, web duniya, web dunia, hindi nai duinia, hindi megzine, Deepak bharatdeep, Deepak bapu

वैलंटाईन डे का एक दिन में शोर थमा (हास्य-व्यग्य)

दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: कल वैलंटाईन डे बीत गया। पिछले प्रदंह दिन से उसका प्रचार जोरदार ढंग से हुआ। आज अनेक खबरें इस बारे में … more →

Tags: चिंतन, अभिव्यक्ति, jagran, abhivyakti, editoriyal, Internet, Friends, Anubhuti, India

एक दिन क्या पूरा महीना है मज़े लेने का - व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: वैलंटाईन डे की चर्चा आजकल सुर्खियों में हैं। इसका कुछ लोग विरोध करते हैं तो कुछ नारी स्वतंत्रता के न … more →

Tags: inglish, हिन्दी, Dashboard, अभिव्यक्ति, ताल-बेताल, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, Education, Family

उपेक्षासन सीख लो तो तनाव नहीं रहेगा-व्यंग्य 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: हम कपड़े क्यों पहनते हैं? इसके चार जवाब हो सकते हैं 1.सभी कपड़े पहनकर घूमते हैं। 2.हम बिना कपड़े पहन … more →

Tags: Blogroll, web duniya, web dunia, Deepak bharatdeep, Deepak bapu, hindi bhasakar, inglish, hindi culture, व्यंग्य

मधुशाला पसंद है पर मद्यपान नहीं -व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: हिंदी भाषा के महान कवि हरिबंशराय बच्चन ने मधुशाला लिखी थी। अनेक लोगों ने उसे नहीं पढ़ा। कई लोग ऐसे ह … more →

Tags: आलेख, हिंदी, चिन्तन, व्यंग्य, web dunia, web bhaskar, web navabharat, कथा साहित्य, अभिव्यक्ति

मंदी का दौर:नया उपभोक्ता वर्ग कहां से आयेगा-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: अमेरिका के उद्योगपति बिल गेट्स ने कहा है कि वर्तमान मंदी अगले चार साल तक चल सकती है। बिल गेट्स विश्व … more →

Tags: हिन्दी, संपादकीय, अभिव्यक्ति, jagran, editoriyal, Internet, Friends, Anubhuti, India

आजाद होकर भी गुलाम खड़े मालिकों की कृपा के इंतजार में -हास्य व्यंग्य कविताएँ

दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: परदेस में पुजने से ही देश में भगवान बनेंगे कैसा यह उनका भ्रम है। देश के लोगों से मिले मान से क्या गौ … more →

Tags: हिन्दी, अभिव्यक्ति, jagran, Internet, Friends, सन्देश, अनुभूति, साहित्य, Deepak bharatdeep

सभी पियक्कड़ हो जाते, जो पहुंचे मधुशाला-व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: हिंदी भाषा के महान कवि हरिबंशराय बच्चन ने मधुशाला लिखी थी। अनेक लोगों ने उसे नहीं पढ़ा। कई लोग ऐसे ह … more →

Tags: hasya -vyangya, hasya vyang, vyangya, aritile in hindi, हिंदी आलेख, hindi article, Hindi writing, hindi kavita, vyangya kavita

बाज़ार में खौफ का अफ़साना-हिन्दी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: <strong>कुछ हकीकत कुछ ख्वाव बन जाता है  यूँ ही अफसाना सुर्खियों में बने रहें अख़बारों की  चर्च … more →

Tags: अभिव्यक्ति, Friends, अनुभूति, शब्द, Deepak bharatdeep, दीपक भारतदीप, web dunia, web duniya, web bhaskar

मानव सभ्यता पर वाद-विवाद-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: आज एक समाचार में एक इतिहासकार द्वारा इतिहास में अयथार्थ से भरे तथ्यों को शैक्षणिक पाठ्यक्रमों से हटा … more →

Tags: आलेख, चिंतन, संपादकीय, अभिव्यक्ति, editoriyal, Friends, India, सन्देश, अनुभूति

रौशनी ने भी अपने रूप बदले हैं-हिंदी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: निकले थे अंधेरे में माटी के चिराग ढूंढने पर कांच के बल्ब के टुकड़े लग गये पांव में रौशनी ने भी अपने … more →

Tags: हिन्दी, अभिव्यक्ति, jagran, Internet, Friends, सन्देश, अनुभूति, साहित्य, Deepak bharatdeep

भक्तिकाल और अध्यात्मिकता -आलेख

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: शायद वह लोग सही कहते हैं कि ‘हिंदी सिखाने के लिये रहीम,तुलसी और कबीर की रचनाओं को नहीं पढ़ाना चाहिये … more →

Tags: चिंतन, अध्यात्म, अभिव्यक्ति, jagran, Internet, hindu, bharat, अनुभूति, Deepak bharatdeep

कतरनों में मनोरंजन -हास्य कविताऐं1 comment

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: बेच रहे हैं मनोरंजन कहते हैं उसे खबरें भाषा के शब्दकोष से चुन लिए हैं कुछ ख़ास शब्द उनके अर्थ की बना … more →

Tags: jagran, Internet, Friends, India, सन्देश, शब्द, साहित्य, Deepak bharatdeep, दीपक भारतदीप

फरेबी भी बदनाम होकर नाम तो पा जाते हैं-व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: अपनी काबलियत पर न इतना इतराओ इनाम यहां यूं ही नहीं मिल जाते हैं भीख मांगने का भी होता है तरीका लूटने … more →

Tags: चिंतन, अभिव्यक्ति, abhivyakti, Internet, Friends, bharat, India, सन्देश, अनुभूति

अध्यात्म ज्ञान के बिना धर्म को समझना कठिन-चिंत्तन

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: धर्म क्या है यह समझे बिना उसकी आलोचना करना गलत है। किसी भी धार्मिक विद्वान् ने अपने विचार से धर्म की … more →

Tags: हिन्दी, आलेख, चिंतन, संपादकीय, अभिव्यक्ति, jagran, alekh, abhivyakti, adhyatm

कुछ पल आंसू बहाने के बाद सब भूल जाते हैं-हिंदी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अच्छा लगता है दूसरों की जंग की बात सुनकर पर आसान नहीं है खुद लड़ना दूसरों के घाव देखकर भले ही दर्द उ … more →

Tags: dashbaord, inglish, चिन्तन, व्यंग्य, bharat, web dunia, web bhaskar, web navabharat, अभिव्यक्ति


Have your say. Start a blog.

See our free features →

Related Tags
All →

Follow this tag via RSS