बिन तुम्हारे मैं क्या हूँ तुम न समझोगे आप तन्हाई की सदा हूँ तुम न समझोगे तुम्हारे ग़मे-इश्क़ में जो चाँद पिरोता रहा मैं साँस का वो टुकड़ा हूँ तुम न समझोगे तुम्हारे दिल में जो हर लम्हा बहता है मैं लहू क… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: बिन तुम्हारे मैं क्या हूँ तुम न समझोगे आप तन्हाई की सदा हूँ तुम न समझोगे तुम्हारे ग़मे-इश्क़ में जो च … more →