इस जानिब य उस जानिब कौन ‘नज़र’ है कौन ‘ग़ालिब’ एक बला है दर्दे-निहाँ कौन बुरा कौन भला साहिब यह मंडी भी ख़ूब है जिसमें दाम नहीं देता कोई वाजिब दिन को जी भर सो लिये हुए रात ख़ाबों… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: इस जानिब य उस जानिब कौन ‘नज़र’ है कौन ‘ग़ालिब’ एक बला है दर्दे-निहाँ कौन बुरा … more →