विनय प्रजापति wrote 5 months ago: दिल का जला होता तब रोशनी होती मैं तो जल … more →
विनय प्रजापति wrote 5 months ago: मैं मर जाऊँ तो अपनी हद से गुज़र जाऊँ तो क … more →
विनय प्रजापति wrote 5 months ago: हल्के-हल्के आँसू टूटे हैं मेरी आँखों स … more →
विनय प्रजापति wrote 5 months ago: जब भी तेरा नाम लेती हैं बहुत ख़ुश होती … more →
विनय प्रजापति wrote 5 months ago: मैं आँखों के लिए ख़ाब खरीदने निकला सित … more →
विनय प्रजापति wrote 5 months ago: आसमाँ को आज उसका हक़ पहुँचा यह तीर जो मे … more →
विनय प्रजापति wrote 6 months ago: दर्द सुलगते क्यों हैं जलते क्यों नहीं … more →
विनय प्रजापति wrote 6 months ago: जितनी मै उन आँखों में थी उतनी और कहाँ ज … more →
विनय प्रजापति wrote 6 months ago: तेरी जो ख़ाहिश करता हूँ क्या कोई गुनाह … more →
विनय प्रजापति wrote 6 months ago: ख़ामोश निगाह तेरी क्या बातें करती है आ … more →
विनय प्रजापति wrote 6 months ago: अंगीठी में सुलगता कोयला झलोगे तब जाकर … more →
विनय प्रजापति wrote 6 months ago: तुम मेरे हो तुम मेरे हो तुम मेरे हो दिल … more →
विनय प्रजापति wrote 6 months ago: आती-जाती रहती हैं यह सदियाँ रास्ते पर … more →
विनय प्रजापति wrote 6 months ago: कोई आता है ज़िन्दगी में, जैसे रोशनी जज़् … more →
विनय प्रजापति wrote 7 months ago: flowers knew how to bloom i always setout myself from the crowded rooms i spent all day and night in … more →
mehhekk wrote 7 months ago: श्रेष्ठदान मनुष्य का जो जीवन मिला है स … more →
विनय प्रजापति wrote 8 months ago: धीरे-धीरे उतरती है साँस सीने में यह दर … more →
विनय प्रजापति wrote 9 months ago: तुमको ज़िन्दगी की हर ख़ुशी मिले तेरे लब … more →
विनय प्रजापति wrote 11 months ago: दिल की बस्तियाँ जलीं पर उठा नहीं धुँआ … more →