तकदीर ने कुछ अनकहे फ़ैसले सुनाए कबुल कर उन्हे सराखों पर लिये है | ये दर्द छलक कही नासूर ना बन जाए जख्म इस टूटे जिगर के सारे सिये है | ये सोचकर कही प्यासे ना मर जाए जाम जहर के हमने हंस कर पिये ह… more →
mehekmehhekk wrote 1 year ago: तकदीर ने कुछ अनकहे फ़ैसले सुनाए कबुल कर उन्हे सराखों पर लिये है | ये दर्द छलक कही नासूर ना बन जाए … more →