Blogs about: Fall
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तुम्हारी ख़ुशबू से महक उठा है मन
तुम्हारी ख़ुशबू से महक उठा है मन तुम्हारे तस्व्वुर से भर आये नयन बरखा की मखम… more »
तख़लीक़-ए-नज़र
तुम्हारी ख़ुशबू से महक उठा है मन
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विनय प्रजापति wrote 1 month ago: तुम्हारी ख़ुशबू से महक उठा है मन तुम्ह … more »
ज़िन्दगी ढूँढ़ते-ढूँढ़ते मैं तुम तक आ गया
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विनय प्रजापति wrote 1 month ago: ज़िन्दगी ढूँढ़ते-ढूँढ़ते मैं तुम तक आ ग … more »
वह जो मेरे ज़ख़्म गिनता है
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: वह जो मेरे ज़ख़्म गिनता है तो कहता है बस … more »
तन्हाई यूँ ढूँढ़ती है मुझे
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: तन्हाई यूँ ढूँढ़ती है मुझे जैसे मेरी स … more »
ख़िज़ाँ मुस्कुराने लगी
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: ख़िज़ाँ मुस्कुराने लगी सूखे पत्ते उड़ … more »
टूटे हुए चाँद को
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: टूटे हुए चाँद को सादे काग़ज़ में लपेटा … more »
मेरी मोहब्बत है तू कहाँ
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: मेरी मोहब्बत, है तू कहाँ, तू कहाँ है जिस … more »
वह बारिश की छीटें
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: वह बारिश की छीटें वह बारिश की बूँदें फ … more »
ख़ामोशी ही ख़ामोशी है
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: ख़ामोशी ही ख़ामोशी है अंधेरी रातों मे … more »
जब पतझड़ के मौसम आते हैं
विनय प्रजापति wrote 3 months ago: तुझे देखा तू ही मेरी हमनशीं तुझे चाहा … more »
कोंपलें हर शाख़ बनी पत्तियाँ अब
विनय प्रजापति wrote 4 months ago: कोंपलें हर शाख़ बनी पत्तियाँ अब दामने- … more »
ख़ाली सीने में कुछ धुँआ-धुँआ-सा है
विनय प्रजापति wrote 4 months ago: ख़ाली सीने में कुछ धुँआ-धुँआ-सा है जिस … more »
अब 'विनय' तेरे ग़म से ग़ाफ़िल नहीं रहा
विनय प्रजापति wrote 7 months ago: अब ‘विनय’ तेरे ग़म से ग़ाफ़िल नहीं रहा दे … more »
नज़्म का कोई सिरा मिले...
विनय प्रजापति wrote 8 months ago: टूटा हुआ चाँद है मटमैली-सी रात में बुझ … more »
एक सफ़्हा
विनय प्रजापति wrote 8 months ago: सुबह एक सफ़्हा, शाम एक सफ़्हा दिन एक सफ़्ह … more »
