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समाचार हिन्दी में-व्यंग्य कविता (news in hindi-satire poem)

दीपक भारतदीप wrote 4 days ago: समाचार भी अब फिल्म की तरह टीवी पर चलते हैं। हास्य पैदा करने वाले विज्ञापनों के बीच दृश्यों में हिंसा … more →

Tags: अभिव्यक्ति, मस्तराम, व्यंग्य, शायरी, शेर, समाज, साहित्य, हिन्दी पत्रिका, हिन्दी शायरी

फरिश्ते होने का अहसास जताते-व्यंग्य कविता2 comments

दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: किताबों में लिखे शब्द कभी दुनियां नहीं चलाते। इंसानी आदतें चलती अपने जज़्बातों के साथ कभी रोना कभी ह … more →

Tags: दीपक भारतदीप, मस्त राम, मस्तराम, हिन्दी, Deepak bharatdeep, Friends, hasya kavita, hasya vyang, hasya -vyangya

योगासन, प्राणायाम, ध्यान और धारणा-हिन्दी लेख (hindi lekh on yogasan)

दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: प्राचीन भारतीय योग साधना पद्धति की तरफ पूरे विश्व का रुझान बढ़ना कोई अस्वाभाविक घटना नहीं है। आज से द … more →

Tags: अनुभूति, आलेख, मस्तराम, समाज, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Deepak bharatdeep, E-patrika, Friends

भर्तृहरि नीति शतक-धन की ऊष्मा से रहित मनुष्य क्या रह जाता है (heat of money-hindu sandesh)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: भर्तृहरि महाराज कहते हैं कि  ————————— … more →

Tags: अध्यात्म, अनुभूति, आलेख, कला, चिंतन, दीपक भारतदीप, मस्त राम, सन्देश, समाज

दिवाली का शुभ दिन बीत गया-आलेख (hindi article on diwali festival

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: होश संभालने के बाद शायद जिंदगी में यह पहली दिवाली थी जिसमें मिठाई नहीं खाई। कभी इसलिये मिठाई नहीं खा … more →

Tags: अध्यात्म, अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, मस्तराम, साहित्य, Blogging, Deepak bapu, Deepak bharatdeep

खाली ज़ेब का रुआब-हास्य व्यंग्य कविता (khali zeb ka ruaab-hindi hasya kavita)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: सूखी मन गयी दिवाली क्योंकि जेब थी खाली, ज़माने में अपना रुआब दिखाने के लिए सबसे कह रहे हैं”हैप … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कविता, मस्तराम, समाज, साहित्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, हिन्दी शायरी

न्यायालय ५ बजे बन्द होता है3 comments

उन्मुक्त wrote 3 months ago: शैरन केलर (Sharon Keller) सबसे पहले १९९४ में टेक्साज़ अपीली न्यायालय की न्यायाधीश चुनी गयी थीं। वे इ … more →

Tags: कानून, दर्शन, विचार, हिन्दी, Capital Punishment, hindi, Judge, Law, Life

संत कबीर के-रात के सपने निराशा का भाव पैदा करते हैं (sant kabir-rat ke sapne aur nirasha)

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: कबीर सपनें रैन के, ऊपरी आये नैन जीव परा बहू लूट में, जागूं लेन न देन संत शिरोमणि कबीरदास जी का आशय य … more →

Tags: abhivyakti, adhyatm, अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, चिंतन, दीपक भारतदीप, दोहे, मस्त राम

अनंत शब्दयोग को विश्व में आठवीं वरीयता मिली-संपादकीय (top ranking 8 in world

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: यह एलेक्सा की चूक भी हो सकती है और सच भी कि इस लेखक के ‘अनंत शब्दयोग’ ब्लाग को विश्व में … more →

Tags: Hindi online journalism, Hindi knowledge, Hindi Darshan, India, hindi bharat, web duniya, Hindi vews, hindi megzine, hindi shabd

कौटिल्य का अर्थशास्त्र-गिरने का भय और गिरा देता है (girne ka bhay-kautilya ka arthshastra

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: कौटिल्य के अर्थशास्त्र के अनुसार ——————– प्रमाणश्चधिकश्याप … more →

Tags: Blogroll, Hindi Education, Hindu darshan, Hindu culture, India, bharat, hindu dharm, web duniya, hindi adhyatm

शराबी ईमेल-हास्य व्यंग्य (hasya vyangya)

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: उस ईमेल में सबसे ऊपर लगे फोटो में शराब की बोतलें सजी थीं। नीचे संदेश में लिखा था कि ‘कृपया इस ईमेल क … more →

Tags: hindi journlism, hindi web, hindi epatrika, web duniya, web dunia, hindi nai duinia, hindi megzine, Deepak bharatdeep, Deepak bapu

‘सविता भाभी’ से मस्त राम पीछे- व्यंग्य आलेख 'savita bhabhi' se pichhe 'mastram'-hindi vyangya article

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: कुछ दिन पहले तक शायद बहुत कम लोग जानते होंगे कि ‘सविता भाभी’ नाम की कोई वेबसाइट होगी जिस पर ‘लोकप्रि … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, मस्तराम, व्यंग्य, समाज, साहित्य, Deepak bapu, Deepak bharatdeep, E-patrika

कुछ खोई हुई

mequitnever wrote 6 months ago: आज मैं अपने डेस्क को ठीक कर रहा था और कहीं कोने से मेरे हाथ एक फोल्डर लगा | उस फोल्डर में रंगीन कगाज … more →

Tags: ज़िन्दगी life, Life, angry, Awareness, कविता, कवितायें, हिंदी कविता, हिंदी कवितायें, death

माक्यावैली के प्रसिद्ध कथन, " द प्रिन्स " से

mequitnever wrote 6 months ago: माक्यावैली की किताब "द प्रिन्स", 1532 में प्रकाशित निकोलो माक्यावैली द्वारा, इतालवी भाषा म … more →

Tags: ज्ञान, Political Science, Politics, Famous Quotations, flornce, Italy, Life, Machiavelli, Pain

परीक्षा परिणाम-हास्य व्यंग्य कविता 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: उतरा मूंह लेकर फंदेबाज घर आया और बोला- ‘दीपक बापू, बड़ा बुरा दिन आया हाईस्कूल के इम्तहान में मोहल्ले … more →

Tags: दीपक भारतदीप, समाज, हिन्दी, Friends, hasya kavita, hasya vyang, Hindi writing, India, vyangya

मुस्कराहट का मुखौटा-व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: बेकद्रों की महफिल में मत जाना बहस के नाम पर वहां बस कोहराम मचेगा पर कौन, किसकी कद्र करेगा। मुस्कराहट … more →

Tags: समाज, हास्य कविता, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Blogging, Blogroll, Deepak bapu, Deepak bharatdeep, E-patrika

आशीर्वाद-लघुकथा2 comments

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: वह युवक गरीब था तब संत के पास जाता था। वह उनके यहां आश्रम की साफ सफाई करता और फिर अपने काम पर चला जा … more →

Tags: दीपक द्वारा, दीपक भारतदीप, मस्तराम, समाज, साहित्य, सृजन, हिन्दी, Deepak bapu, Deepak bharatdeep

गुलामी जैसी आज़ादी-व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: नजरें फेरकर वह चले जाते हैं। देखने में लगते हैं हमसे बेपरवाह पर हकीकत यह है कि हमारी आंखों में उनको … more →

Tags: hasya -vyangya, writer, hindi article, Hindi writing, vyangya kavita, Friends, समाज, India, Deepak bharatdeep

‘‘मैं कुर्सी हूं, किसी की सगी नहीं’’-हास्य व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: कुर्सी पर चाहे लिपिक लिखा हो या महाप्रबंधक बस वह मिलना चाहिए। अपने घर में जिस पर स्वयं बैठ सकें वह ल … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, मस्तराम, व्यंग्य, हास्य व्यंग्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Deepak bharatdeep, E-patrika


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